प्रदर्शन के जरिए घाटी में अलग होमलैंड की मांग, विस्थापित समुदाय की सुरक्षा और लंबित मुकदमों में जल्द न्याय समेत विभिन्न मुद्दे केंद्र सरकार के सामने उठाएंगे। संगठन की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित मांगपत्र तैयार किया जा रहा है।
इसमें कश्मीरी पंडित समुदाय से जुड़े प्रमुख मुद्दों को शामिल किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के मंत्रियों से भी मुलाकात का प्रयास किया जाएगा, ताकि मांगों और समुदाय की समस्याओं को सीधे सरकार के समक्ष रखा जा सके। पनुन कश्मीर के पदाधिकारी इन दिनों मांगपत्र को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। संगठन का कहना है कि लंबे समय से लंबित मुद्दों के समाधान के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर ठोस पहल जरूरी है। प्रदर्शन में महिलाओं की भी प्रमुख भागीदारी रहेगी। इसके लिए संगठन की ओर से समुदाय के विभिन्न वर्गों से संपर्क किया जा रहा है।
अक्तूबर में प्रस्तावित दिल्ली कार्यक्रम को लेकर संगठन कार्यकर्ताओं के बीच तैयारियां तेज हो गई हैं। प्रदर्शन के माध्यम से कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास, सुरक्षा, न्याय और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी है।
विस्थापित कश्मीरी पंडितों की प्रमुख मांगें
- कश्मीर में पंडितों के नरसंहार को आधिकारिक मान्यता देने और इसके लिए विशेष नरसंहार कानून बनाने की मांग।
- झेलम नदी के उत्तर और पूर्व में अलग केंद्र शासित प्रदेश के रूप में सुरक्षित मातृभूमि स्थापित करने की मांग।
- बेरोजगार और ओवरएज युवाओं के लिए केंद्र सरकार के विभागों में 15 हजार पद सृजित करनेकी मांग।
- विस्थापित कश्मीरी पंडित परिवारों के लिए अनुग्रह राशि और मिलने वाली मासिक राहत में बढ़ोतरी की मांग।
विस्थापन से समुदाय का दावा समाप्त नहीं हुआ है और समय बीतने के साथ उसके अधिकार कम नहीं हुए हैं। इसी भावना के साथ 24 अक्तूबर को जंतर-मंतर पर अनशन किया जाएगा। उन लोगों को श्रद्धांजलि दी जाएगी, जिन्होंने कश्मीर की सभ्यतागत पहचान, गरिमा और राष्ट्रीय चरित्र की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। -डॉ. अग्निशेखर, संयोजक पनुन कश्मीर
अनशन के दौरान कश्मीरी हिंदुओं के कथित नरसंहार की सच्चाई को भुलाए नहीं जाने, इतिहास को दोबारा न लिखे जाने व न्याय में अनिश्चितकालीन देरी न होने की मांग को दोहराया जाएगा। साथ ही पनुन कश्मीर को अपना होमलैंड बनाने की मांग को भी मजबूती से उठाने का संकल्प लिया जाएगा। -टीटू गंजू, अध्यक्ष पनुन कश्मीर
यह संदेश देने का प्रयास किया जाएगा कि समुदाय के बलिदान और विस्थापन का अध्याय अतीत तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जिम्मेदारी भी है। समुदाय के जिन उद्देश्यों के लिए लोगों ने प्राण न्योछावर किए और एक पूरा समुदाय अपने घरों से उजड़ गया, उन्हें भुलाया नहीं जाएगा। -एमके धर, प्रवक्ता पनुन कश्मीर