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महबूबा बोलीं, पत्थरबाजी कश्मीरियों का दर्द बढ़ाने वाला दिमागी फितूर

Sun, 12 Jun 2016 10:05 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
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जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती - फोटो : PTI
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पत्थरबाजी को कश्मीरियों का दर्द बढ़ाने वाला दिमागी फितूर करार दिया है। कहा कि इसके लिए कश्मीर के पिछड़े वर्ग की नई पीढ़ी को इस्तेमाल किया जा रहा है। पत्थरबाजी के बजाए युवाओं को शिक्षा के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए ताकि वह बेहतर भविष्य संवारने में जुट सकें। तुलमुला स्थित क्षीर भवानी मंदिर पहुंची मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं के साथ मुलाकात के दौरान यह बातें कहीं। 
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क्षीर भवानी श्रद्धालुओं पर पत्थरबाजी की घटना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि असल में असामाजिक तत्व वानपोह में स्थापित नई पुलिस चौकी पर पत्थर बरसा रहे थे। श्रद्धालुओं के 80 वाहन वहां से गुजर चुके थे। 

पथराव के दौरान एक वाहन चपेट में आ गया। उसमें सवार दो श्रद्धालुओं को चोटें आईं हैं। ऐसी घटना को अलग करके देखने की जरूरत है। महबूबा ने कहा रमजान में रोजेदार यदि क्षीर भवानी श्रद्धालुओं को दूध, आहार और पूजा की सामग्री उपलब्ध करवा रहे हैं तो यह कश्मीरी पंडितों के साथ उनके भाईचारे की भावना का परिचायक है। 
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पंडितों को बलपूर्वक नहीं बल्कि इच्छा से घर वापसी होगी

- फोटो : PTI
मेले में आए कई श्रद्धालु नब्बे के दशक के बाद पहली मर्तबा यहां आए हैं। मुस्लिम समुदाय से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हैं। मेला स्थल कश्मीर के भाईचारे की परंपरा को दर्शा रहा है। ऐसे में सभी को मिलकर कश्मीर की शांति और तरक्की के लिए दुआ करनी चाहिए। 

मुख्यमंत्री के साथ उनके सलाहकार प्रो. अमिताभ मट्टू, विधायक इश्फाक जब्बार, यासिर रेशी, पूर्व मंत्री काजी मोहम्मद अफजल भी थे। महबूबा अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र में भी गईं और पत्थरबाजी में घायल लड़की का हाल पूछा। 

कश्मीरी पंडितों की वापसी के लिए सरकार के प्रयास पर महबूबा ने कहा पंडितों की वापसी गरिमा पूर्ण ढंग से होगी। सरकार ने अस्थायी रूप से कंपोजिट ट्रांजिट सुविधा देने की योजना बनाई है। कुछ समय रहने के बाद जब कश्मीरी पंडित खुद घरों को जाना ठीक समझें तो वे जा सकेंगे। 

महबूबा ने कहा पंडितों की वापसी बलपूर्वक नहीं बल्कि उनके मन के मुताबिक ही होगी। कश्मीर के अलगाववादी नेताओं से लेकर कई सियासी दलों के नेता सुरक्षा कारणों से अपने पुश्तैनी मकान और गांव छोड़कर पलायन किए हुए हैं। ऐसे में कश्मीरी पंडितों को वापस भेजना उचित नहीं है। 
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