कश्मीरी पंडितों की संस्था पनुन कश्मीर ने रियासत से 35-ए हटाने की वकालत की है। उसका कहना है कि विस्थापित कश्मीरी पंडित स्टेट सब्जेक्ट कानून को हटाने का समर्थन करता है। इसके हटने से रियासत की बेटियों के साथ हो रहा अन्याय भी दूर होगा।
संस्था के अध्यक्ष अश्विनी कुमार चिरुंगू ने यहां पत्रकारों से कहा कि 35-ए की वजह से ही हमारी बेटियों को दूसरे राज्य में विवाहित होने के बाद जम्मू-कश्मीर में अपने सभी अधिकारों को खोना पड़ रहा है। दूसरे राज्य में गैर कश्मीरी व्यक्ति के साथ विवाह करने पर अपने सभी अधिकार खोने के बाद जम्मू-कश्मीर की निवासी चारू वाली खन्ना ने सर्वोच्च न्यायालय में 35-ए के खिलाफ दरवाजा खटखटाया है। इसकी 6 अगस्त को सुनवाई होने वाली है।
एनजीओ और अन्य ग्रुप ने भी अदालत में इसे चुनौती दी है। हम पिछले 30 वर्षों से इस कानून को झेल रहे हैं। हमारी बेटियां दूसरे राज्यों में शादी के बंधन में बंधने के बाद अपने ही गृह राज्य में सभी मौलिक अधिकार खो देती हैं। उन्होंने तकनीकी तौर पर इसकी वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह संसद से पास नहीं है।
उन्होंने कहा कि अलगाववादी कश्मीरी सियाही को अपने स्वार्थ के लिए भूना रहे हैं। घाटी में व्यापारी और दूसरा वर्ग भी इसका विरोध कर रहा है। केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 और 35ए में बदलाव को महसूस किया है। जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय होने के बाद भारतीय संविधान में भी ऐसे अनुच्छेद का अधिक महत्व नहीं रहता है।