पनुन कश्मीर के अध्यक्ष वीरेंद्र रैना ने विस्थापित कश्मीरी पंडितों को भ्रमित करने के लिए कुछ समूहों द्वारा हाल में किए गए प्रयासों की कड़ी निंदा की। कहा कि कश्मीर में स्थितियां सामान्य नहीं हैं, ऐसे उन सभी कश्मीरी पंडित युवाओं को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने की आवश्यकता है, जो कश्मीर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर में हाल के राजनीतिक घटनाक्रम पर विचार-विमर्श करने के लिए पनुन कश्मीर ने कोर समिति की बैठक बुलाई। इस दौरान कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के साथ-साथ मंदिरों की स्थिति में सुधार के लिए सरकार से विधेयक लाने की मांग की गई।
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पनुन कश्मीर के अध्यक्ष वीरेंद्र रैना ने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि घाटी में कश्मीरी पंडितों की वापसी के साथ कर्मचारियों के पैकेज को मिश्रित करने की आवश्यकता नहीं है। कश्मीर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा है जिसे राजनीतिक के उच्चतम स्तर पर निपटाया जाना चाहिए।
इस दौरान महासचिव कमल बागती ने कहा कि यह खुशी की बात है कि कश्मीर में मंदिरों की दयनीय स्थिति के बारे में प्रवासी कश्मीरी पंडितों के विभिन्न वर्गों के बीच वैश्विक चेतना है। नवरात्र के अवसर पर समुदाय के अपने भाषण में आरएसएस सरकार्यवाह ने भी इस चिंता का उल्लेख किया। हम सरकार से कश्मीर में मंदिरों के संरक्षण के लिए एक विधेयक लाने की अपील करते हैं।