कश्मीरी विस्थापितों ने विश्व शरणार्थी दिवस पर शनिवार को जंतर मंतर पर विशाल मशाल रैली का आयोजन कर सरकार पर उनके मुद्दे की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
रैली में हिस्सा लेने वाले लोगों ने कहा कि वह विस्थापित नहीं बल्कि अपने ही देश में शरणार्थी हैं क्योंकि वह अपने घर अपनी मर्जी से छोड़कर नहीं आये थे, उन्हें वहां से भगाया गया था।
जंतर मंतर पर शनिवार को इंटरनली डिस्प्लेस्ड कश्मीरी पंडित (आईडीकेपी) की ओर से आयोजित रैली में कश्मीरी लोगों के साथ ऑल इंडिया एंटी टेरेरिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष एमएस बिट्टा ने भी हिस्सा लिया।
रैली के आयोजन के दौरान सरकार से तीन मांगे की गईं। कश्मीरी पंडितो को यूएन के दिशानिर्देश के मुताबिक आंतरिक शरणार्थी घोषित करना, कश्मीरी पंडितों का नरसंहार करने वालों को सजा दिलाना और कश्मीरी पंडितों को विस्तास्ता नदी के उत्तर पूर्वी इलाके में बसाना शामिल हैं।
आईडीकेपी के संयोजक डॉक्टर अग्निशेखर ने सरकारों के रवैये पर नाराजगी जाहिर कर कहा कि कश्मीरी पंडित अपने ही देश में शरणार्थी की तरह जी रहें और मौजूदा एनडीए सरकार व पिछली सरकारे उन्हें विस्थापित कहती रही हैं। विस्थापित का मतलब है कि बेहतर भविष्य के लिये हम अपना घर छोड़कर आये जबकि ऐसा नहीं है।