बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने कश्मीरियत को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। त्रासदी का भी हंसकर सामना कर रहे कश्मीरी पंडित असल में हीरो हैं, लेकिन उन्हें पुनर्वास का हक मिलना चाहिए। घाटी में जरूर पंडितों की वापसी होगी।
अधिकारों के लिए पंडितों को खुद रास्ते तलाश करने होंगे। महिला कालेज गांधीनगर में रविवार को प्रेम नाथ भट्ट मेमोरियल ट्रस्ट के समारोह में पहुंचे खेर ने पंडित अभिभावकों को बच्चों को कश्मीरी भाषा से जोड़ने पर बल दिया।
इस चेतना दिवस पर देश के लिए कुर्बानी देने वाले अनंतनाग के शहीद प्रेम नाथ भट्ट सहित अन्य शहीदों की शहादत को याद किया गया।
खेर ने कहा कि त्रासदी ने पंडितों को काफी कुछ सिखाया है। उन्हें दूसरों से खुद को दया के लिए नहीं, बल्कि अधिकारों के लिए लड़ना होगा।
पंडित अपनी आवाज को बुलंद करने के लिए सोशल मीडिया का भी खुलकर सहारा लें। उन्होंने एक कविता ‘लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती’से पंडितों का हौसला बढ़ाया।
इस दौरान खेर सहित अन्य अतिथिगणों में अशोक पंडिता और ट्रस्ट के प्रधान डा. अर्जुन नाथ पंडिता ने दो शहीदों में बारामुला से शहीद अवतार सिंह पंडिता और बड़गाम से वीरजीत भट्ट के परिवार वालों को शाल और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।