कश्मीरी पंडितों के लिए घाटी में अलग टाउनशिप के मुद्दे पर मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद अलगाववादियों के साथ सुर मिलाते नजर आ रहे हैं। मुफ्ती ने पहले केंद्र सरकार को टाउनशिप के लिए जमीन मुहैया कराने का वादा किया और अब उन्होंने कश्मीर में इजरायल जैसा क्लस्टर बनाए जाने से इनकार किया है।
गठबंधन के घटक दल पीडीपी और भाजपा इस मुद्दे पर फिर आमने-सामने हैं। दोनों दलों में ठन गई है। वीरवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि कश्मीरी पंडितों को उनके पैतृक स्थान पर ही बसाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों को बसाने के लिए अलग क्लस्टर बनाने की कोई योजना नहीं है।
मुफ्ती ने अलग लफ्जों में लगभग वही सब बातें दोहराईं जो एक दिन पहले जेकेएलएफ की ओर से कही गईं थीं। लगभग इसी तरह का बयान बुधवार को सरकारी प्रवक्ता की ओर से भी जारी किया गया था। जेकेएलएफ ने इस मुद्दे पर आंदोलन और बंद का ऐलान किया था। मुफ्ती ने कहा कि जो कश्मीरी पंडित वापस आना चाहते हैं उन्हें अलग-थलग नहीं रहना चाहिए। हम उनके पुराने स्थान पर उनका स्वागत करेंगे।
अलग टाउनशिप पर कायम केंद्र सरकार
उधर भाजपा इस मुद्दे पर फंस गई है। पंडितों की घाटी में वापसी भाजपा का अहम एजेंडा रहा है। केंद्र सरकार अलग टाउनशिप पर कायम है। भाजपा विधायक रवीन्द्र रैना का कहना है कि कश्मीरी पंडितों को बिना सुरक्षा दिए घाटी में जहां-तहां बसा देना उचित नहीं होगा। केंद्र सरकार और पंडितों की सहमति से ही फैसला होगा।
अलगावादियों और आतंकवादियों की धमकी के सरकार नहीं झुकेगी। नेकां के महासचिव अली मोहम्मद सागर ने भी पंडितों के लिए अलग सेटेलाइट शहर का विरोध किया है। कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी के मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखते हुए मुख्यमंत्री मुफ्ती ने कहा कि पंडितों के लिए अलग सेटेलाइट शहर नहीं बनाया जाएगा।
सरकार पंडितों को उनके पैतृक स्थान पर सम्मान और गरिमा के साथ वापस लाना चाहती है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से दिल्ली में मुफ्ती की मुलाकात के बाद आधिकारिक तौर पर कहा गया था कि पंडितों की टाउनशिप के लिए जमीन मुहैया कराई जाएगी।
'कश्मीरी पंडितों को मिलजुलकर साथ रहना'
नेकां, कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी समूहों और अलगाववादियों ने इसका विरोध किया था। विधानसभा में वीरवार को मुफ्ती ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को बता दिया है कि पंडित अलग-थलग नहीं रह सकते। कश्मीरी पंडितों को घाटी में मिलजुलकर साथ रहना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे पर कुछ लोगों द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा है।
पंडितों की वापसी के लिए अनुकूल माहौल बनाना सरकार का काम है लेकिन इस तरह का भ्रम फैलाया जाता रहा तो वे कैसे वापस लौट पाएंगे। मुफ्ती ने कहा कि उनकी सरकार इस मुद्दे पर कोई जल्दीबाजी नहीं करना चाहती। कोई फैसला लेने से पहले सभी संबंधित पक्षों से सलाह मशविरा किया जाएगा।
वह कश्मीर को विभिन्न तरह के फूलों का खूबसूरत बगीचा बनाना चाहते हैं। धर्मनिरपेक्षता इसकी बुनियाद है। मुफ्ती ने अलगावादियों से कहा कि उन्हें इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे कश्मीर बदनाम होगा।
सिर्फ 15 प्रतिशत पंडित ही घाटी लौटेंगे: मुफ्ती
मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद ने कहा कि सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत कश्मीरी पंडित ही घाटी लौटना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि पंडितों के कई समूहों से चर्चा के बाद ऐसा लगता है कि कश्मीरी पंडितों का बड़ा समूह अब घाटी लौटना नहीं चाहता है। विधानसभा में मुफ्ती ने कहा कि सरकार उन लोगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करेगी जो घर लौटना चाहते हैं।
कश्मीरी पंडितों का बड़ा हिस्सा विदेशों और देश के अन्य हिस्सों में खुशहाल है और वे वहां अच्छी जिन्दगी बिता रहे हैं। अगर सरकार उनकी वापसी के लिए माहौल बनाती है तब भी संपन्न पंडित समूह सीजनल पैटर्न पर ही घाटी आएंगे। मुफ्ती ने कहा कि कश्मीरी पंडित पढ़े-लिखे और अच्छे हैं।
आतंकवाद के दौर से पहले भी कई पंडित घाटी से बाहर गए। पी एन हक्सर, पी एन धर, डॉ. यू कौल, डॉ. समीर कौल आदि इसके उदाहरण हैं। उन्हें बड़े कैनवास की जरूरत थी इसलिए वे बाहर बसे। आतंकवाद के दौर में घाटी के सभी हिस्सों से उन्हें मजबूरी में जाना पड़ा।
अब सरकार उन्हें वापस लाना चाहती है। कश्मीरी पंडित भी चाहते हैं कि उनकी अलग टाउनशिप में नहीं बल्कि उनके पैतृक स्थान पर ही वापसी हो।