ढाई दशक से रियासत में आतंकवाद का दंश झेल रहे जम्मू संभाग के विस्थापित क्षेत्रीय भेदभाव से अछूते नहीं हैं। इन विस्थापितों के लिए न तो कोई पुनर्वास नीति बनी और न कालोनी मिली और न ही मासिक आधार पर इतनी राशि दी गई कि परिवार का पेट भरा जा सके। वर्तमान में इन्हें राहत राशि के नाम पर प्रति परिवार मात्र 1600 रुपये के साथ थोड़ा बहुत राशन दिया जा रहा है।
जम्मू संभाग में आतंकवाद ने वर्ष 1995 में सिर उठाया था। डोडा, रामबन, माहौर, राजोरी, किश्तवाड़, पुंछ समेत कई जिलों में आतंकवाद के चलते सैकड़ों परिवारों को घर छोड़ना पड़ा।
वर्ष 1995 से 2003 तक इन परिवारों ने बिना सरकारी राहत के आठ वर्ष गुजारे। 2003 में इनको 1600 रुपये प्रति परिवार और राशन की सुविधा दी जाने लगी। वर्तमान समय में भी इनको यही मिल रहा है।
जम्मू के विस्थापितों की मांग की फाइलें सरकारी कार्यालयों में घूम रही हैं। माइग्रेंट सेल के प्रधान शेर सिंह और डोडा माइग्रेंट कमेटी जम्मू के चेयरमैन राकेश कुमार शर्मा ने बताया कि सरकार के झूठे आश्वासनों ने इतना निराश कर दिया है कि अब सड़कों पर उतरने के सिवाय कोई रास्ता नहीं है।