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फसल बहा ले गया सैलाब, भंडार में सड़ गए मेवे

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सैलाब ने कश्मीर के मेवा व्यापार की चूलें हिला दी हैं। किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। पूरी फसल तबाह हो गई और भंडार में जमा मेवा भी पानी में डूबकर सड़ गया। कश्मीर से अखरोट और बादाम की सप्लाई पूरे देश में होती रही है।
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सैलाब में इस फसल के तबाह होने से पूरे देश में आपूर्ति प्रभावित होगी जो कीमतों में उछाल का कारण बनेगा। बाढ़ की कहर का असर खत्म होने के बाद कश्मीर आने वाले पर्यटक भी महंगे दाम पर ड्राई फ्रूट खरीदने को मजबूर होंगे।

ड्राई फ्रूट किसानों और व्यापारियों को रियासत सरकार से मुआवजे की उम्मीद है ताकि कर्ज से निजात पाकर अगले साल की खेती के लिए तैयार हो सकें।
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जब फल मिलने का वक्त आया तो पड़ी सैलाब की मार

पंपोर में ड्राई फ्रूट व्यवसाय से जुड़े मोहम्मद यूनुस कहते हैं कि चंदहारा, लेथपुरा और पुलवामा में मेवे की फसल पूरी तरह प्रभावित हुई है। सैलाब उसी वक्त आया जब अखरोट और बादाम को पेड़ से उतार कर भंडारों और दुकानों में लाया जाता है।

फसल बरबाद हो गई और किसान हाथ मलने को मजबूर हुए। अप्रैल इसका फूल निकलता है और सितम्बर में फसल तोड़ी जाती है। किसानों ने मेहनत की और जब फल मिलने का वक्त आया तो सैलाब का कहर टूट पड़ा।

पंपोर में ड्राई फ्रूट की लगभग तीन दर्जन दुकानें हैं। इन सबके शटर गिरे हुए हैं। सैलाब का पानी दुकानों में घुस गया था। दुकान में रखे मेवे भीगकर सड़ गए। पानी अधिक होने के कारण व्यापारी माल बाहर नहीं निकाल सके।

जो बचा उसके ग्राहक नहीं बचे

अखरोट का पेड़ सेब से ऊंचा होता है लेकिन पानी का स्तर उससे भी अधिक था। पानी का बहाव तेज होने के कारण ड्राई फ्रूट टूटकर बह गए।

ड्राई फ्रूट का उत्पादन करने वाले हिलाल अहमद ने बताया कि ताजा फसल नष्ट हो गई और सैलाब से पहले के भंडार को किसी तरह बचाया तो अब उसके ग्राहक नहीं हैं।

यह रनिंग आइटम है। ज्यादा दिन रखा रहने पर खराब हो जाता है। सैलाब के बाद कश्मीर में पर्यटक नहीं आ रहे हैं। माल ज्यादा दिन टिकाए रखना मुश्किल है। पुलवामा जिले में भी ड्राई फ्रूट की फसल को भारी नुकसान हुआ है।
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बैंकों के कर्ज में डूबे किसान

कश्मीर में हर साल लगभग डेढ़ से दो लाख ड्राई फ्रूट का उत्पादन होता है। तीस हजार से ज्यादा की आबादी इसकी खेती और व्यापार से जुड़े हैं। इस कारोबार से जुड़े पम्पोर के व्यापारी शमी कहते हैं कि रियासत सरकार मुआवजे के लिए कुछ नहीं कर रही है।

किसानों पर बैंकों का कर्ज है। सैलाब की तबाही के बाद तमाम बैंक लोन को माफ कर दिया जाना चाहिए। एक-एक किसान और व्यापारी को दस लाख से लेकर एक करोड़ तक का नुकसान हुआ है।
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