अजय पंडिता की हत्या से कश्मीर घाटी में रह रहे 600 से ज्यादा परिवारों में भी खौफ है। इनमें से ज्यादातर वे परिवार हैं जो पहले से वहीं रह रहे हैं। वहीं घाटी में कार्यरत कश्मीरी पंडित समुदाय के करीब तीन हजार युवा भी हैं। इन्हें प्रधानमंत्री विशेष पैकेज के तहत नौकरी दी गई थी। केंद्र की तत्कालीन मनमोहन सरकार ने कश्मीरी विस्थापित परिवारों को 6000 पदों पर भर्ती का पैकेज दिया था। करीब तीन हजार की भर्ती भी हुई।
ये कर्मचारी गांदरबल, बडगाम के शेखपोरा और काजीगुंड के वेसू क्षेत्र में ट्रांजिट कॉप्लेक्स में रहते हैं। घाटी में हालात बिगड़ने पर इन्हें जम्मू आना पड़ता है। सरपंच अजय पंडिता ने सुरक्षा की मांग की थी, जो उन्हें नहीं मिली। पनुन कश्मीर के अध्यक्ष डॉ. अजय च्रुंगू के अनुसार घाटी में रह रहे परिवारों को विशेष सुरक्षा नहीं दी जाती है।
अजय पंडिता का परिवार विभाग के साथ पंजीकृत है। वर्तमान में जम्मू में कुल 43,930 कश्मीरी विस्थापित परिवारों के 1,53,341 सदस्य पंजीकृत हैं। इनमें से 39,576 परिवार कश्मीरी हिंदू हैं। बड़ी संख्या में परिवार दूसरे राज्यों में भी रह रहे हैं।- टीके भट्ट, राहत एवं पुनर्वास आयुक्त, जम्मू-कश्मीर