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कश्मीर में अब सेना ने पढ़ाने का लिया जिम्मा

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श्रीनगर से करीब 180 किलोमीटर दूर कुपवाड़ा जिले का टंगधार इलाका, जो घाटी का पिछड़ा सीमावर्ती क्षेत्र है, जहां से एलओसी थोड़ी ही दूरी पर है। यहां के लोगों की दिनचर्या झकझोरने वाली है। यहां सबसे बड़ी परेशानी बच्चों की शिक्षा का है।
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इसे सेना ने गंभीरता से लिया है। मुश्किल घड़ी में फरिश्ते की तरह मदद को हाथ बढ़ाने वाली सेना यहां भी अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रही। सेना द्वारा न सिर्फ सुविधाएं प्रदान करवाई जा रहीं, बल्कि बच्चों का भविष्य संवारने के लिए सेना का आर्मी गुडविल स्कूल (एजीएस) भी हाजिनार इलाके में स्थापित किया गया है।

इसकी स्थानीय लोग सराहना करते हैं। बड़ी बात यह कि इस स्कूल में पढ़ने वाले छात्र भी अपने आपको खुशकिस्मत मानते हैं। उन्हें पिछड़े इलाके में होने के बावजूद अच्छी शिक्षा मिल रही है।
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आर्मी गुडविल स्कूल ने शुरु की ये मुह‌िम

एजीएस में पढ़ने वाले छात्र यासीन के अनुसार वह टंगधार जैसे सीमावर्ती इलाके में रहते हैं, जो काफी पिछड़ा इलाका है। इसबावजूद उन्हें अच्छी शिक्षा मिल रही है। उन्होंने बताया कि इलाके में कई स्कूल हैं, लेकिन जो शिक्षा का स्तर आर्मी गुडविल स्कूल हाजिनार में है, वैसा कहीं नहीं।

यासीन ने बताया कि उनके स्कूल में स्मार्ट बोर्ड है, जिसके बारे में उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि वह ऐसी तकनीक की सहायता से पढ़ पाएंगे। यासीन के अनुसार उनके स्कूल में लेबोरेटरी, लाइब्रेरी के अलावा कंप्यूटर लैब भी हैं।

छात्रा सना के अनुसार उनके स्कूल के अध्यापक उच्च शिक्षा प्राप्त हैं। उन्होंने बताया कि उनके स्कूल में हर प्रकार की सुविधा सेना द्वारा दी जाती है। सना ने बताया कि वह इस स्कूल में पढ़कर अपने आपको भाग्यशाली समझती हैं।

हाजिनार के आर्मी गुडविल स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक आफताब अख्तर ने बताया कि इस इलाके के बच्चे सेना के स्कूल की सुविधाओं के कारण पढ़ने के लिए काफी इच्छुक हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पढ़ाने के लिए नई-नई तकनीकें अपनाई जाती हैं।
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