फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कश्मीर घाटी में हिंसा के चलते नहीं जलाए जाएंगे कुंभकरण, मेघनाद और रावण के पुतले

Mon, 10 Oct 2016 08:18 PM IST
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
विज्ञापन
रावण के पुतलों का दशहरा पर दहन नहीं होगा - फोटो : File Photo
विज्ञापन
कश्मीर हिंसा के चलते इस साल घाटी में कुंभकरण, मेघनाद और रावण के पुतलों का दशहरा पर दहन नहीं होगा। पिछले साल कश्मीर के कई हिस्सों के लिए गीता भवन जम्मू से कई पुतलों का निर्माण करके भेजा गया था, लेकिन इस साल कश्मीर से ठेकेदार को कोई आर्डर नहीं मिल पाया है। इस साल हिंदू समुदाय के लोगों को विजय दशमी पर पुतलों का दहन न होने का मलाल रहेगा।
विज्ञापन


पिछले 22 वर्षों से गीता भवन जम्मू में रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों के निर्माण के व्यवसाय से जुड़े डा. मोहम्मद गयासुद्दीन ने बताया कि वर्ष 2015 में घाटी के कई हिस्सों के लिए जम्मू से पुतले भेजे गए थे। इसके अलावा लद्दाख में भी पुतलों को भेजा गया था, लेकिन इस बार कश्मीर हिंसा के चलते कोई पुतला घाटी नहीं भेजा गया है।
विज्ञापन

आतंकवाद के दौर में शुरू हुई थी परंपरा

रावण का पुतला - फोटो : File Photo
आतंकवाद के दौर में वर्ष 2007 में घाटी में पुतलों के दहन की परंपरा शुरू हुई थी, लेकिन अगले ही वर्ष 2008 में अमरनाथ भूमि आंदोलन, वर्ष 2010 में कश्मीर हिंसा, वर्ष 2014 में बाढ़ और इस साल दोबारा कश्मीर हिंसा से पुतलों का दहन नहीं हो पा रहा है। कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के पदाधिकारी संजय टिक्कू ने बताया कि विजयदशमी का पर्व बुराई पर सच्चाई की जीत का प्रतीक है।

पिछले कई साल से कश्मीर में पुतलों के दहन की परंपरा को निभाया जा रहा था, लेकिन इस साल कश्मीर हिंसा से इस पर असर पड़ा है। उम्मीद है कि आगामी वर्षों में इस परंपरा को जोर-शोर से आगे बढ़ाया जाएगा। वर्ष 2015 में विजयदशमी पर घाटी में पुतलों के दहन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने शिरकत की थी। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें