संसद में हुए आतंकवादी हमले को आज 14 साल हो गए हैं। इस आतंकवादी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। आज 14 साल बीत चुके हैं, आतंवादियों को मौके पर ही मार गिरा दिया था तो इस हमले के मास्टरमाइंड को भी फांसी हो चुकी है।
इस पूरे हमले की साजिश कश्मीर में बैठकर रची गई थी। जहां से आतंकवादियों ने प्लान बनाकर दिल्ली में अपने पैर जमाए और फिर 13 दिसंबर 2001 को आतंकवादियों ने संसद पर हमला कर दिया था।
मुंबई आतंकवादी हमले के बाद संसद पर हुआ आतंकवादी हमला देश में हुआ सबसे बड़ा आतंवादी हमला था। आतंकवादियों ने कड़ी सुरक्षा घेरे को तोड़कर संसद में ताबड़तोड गोलियां बरसानी शुरू कर दी थी। लेकिन इस हमले की साजिश कश्मीर के अनंतनाग जिले में रची गई थी।
इस साजिश में शामिल हुए पांच आतंकवादी और अफजल गुरू। कश्मीर के बारामुला जिले का रहने वाला अफजल गुरू आतंकवादी हमले से कुछ महीने पहले जैश-ए-मोहम्मद के गाजी बाबा से अनंतनाग में मिला। यहां अफजल गुरू पर दिल्ली में आतंकवादी हमले की साजिश रचने में जमीन तैयार करने के लिए कहा गय।
इसके बाद ही अफजल गुरू ने सात और आठ नवंबर को दिल्ली के क्रिश्चन कॉलोनी में मोहम्मद उर्फ बर्गर को कमरा दिला दिया। मकान मालिक प्रेमचंद को मोहम्मद ने अपना फर्जी कॉलेज का आईडी कार्ड दिखाया और उसको भरोसा दिला दिया।
इसके बाद अफजल गुरू दो बार फिर कश्मीर गया और वहां से अपने साथ दो-दो आतंकी दोनों बार लाया। आखिरी बार जब अफजल कश्मीर पहुंचा तो आतंकवादी हथियार भी अपने साथ लाए थे।