जम्मू-कश्मीर में धर्म परिवर्तन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अब कश्मीरी सिख नेता दिल्ली से आए अकाली दल और गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पर कश्मीर में धार्मिक उन्माद फैलाने का आरोप भी लगा रहे हैं। श्रीनगर में मंगलवार को ऑल पार्टी सिख कोआर्डीनेशन कमेटी (एपीएससीसी) के अध्यक्ष जगमोहन सिंह रैना ने बिना नाम लिए आरोप लगाया कि दिल्ली के कुछ नेता अपने सियासी फायदे के लिए कश्मीर में धार्मिक भावनाओं को भड़काने आए थे। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में किसी भी सिख लड़की का जबरन धर्म परिवर्तन नहीं किया गया है और कुछ लोग दिल्ली, यूपी और पंजाब की चुनावी राजनीति का खेल कश्मीर घाटी में धार्मिक भावनाओं को भड़काकर खेलना चाहते हैं।
रैना ने कहा कि वह सिख समुदाय की ओर से अनुरोध करते हैं कि जम्मू और कश्मीर में अंतरजातीय विवाह अधिनियम लागू किया जाए। एक बार इस अधिनियम के लागू हो जाने के बाद अंतरजातीय विवाह स्वत: समाप्त हो जाएंगे। यह विभिन्न धर्मों के लोगों के हितों की रक्षा करेगा। उन्होंने इस अधिनियम को लागू करने के लिए तर्क देते हुए कहा कि खराब हालात के चलते हजारों की संख्या में कश्मीरी मुसलमान कश्मीर से बाहर पढ़ने के लिए गए हैं और इनमें से करीब 7 हजार ऐसे हैं जिन्होंने गैर मुस्लिम लड़कियों से शादी की है। चिंता का विषय यह है कि करीब 15 हजार कश्मीरी लड़कियां बिन बियाही बैठी हैं, इसलिए अधिनियम का बनना ज़रूरी है।
लड़की के कोर्ट में दायर हल्फनामे को बता रहे फर्जी
वहीं मंगलवार को कथित धर्म परिवर्तन की शिकार एक लड़की की शादी करवाई गई। इस लड़की ने कोर्ट में हल्फनामा दायर किया है, जिसमें उसने धर्म परिवर्तन और शादी की बात कबूली है, लेकिन सिख नेता इस निकाह नामे और एफिडेविट को फर्जी बता रहे हैं और लड़की की सिख लड़के से शादी को लड़की की मर्जी से की गई शादी बता रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि सच कौन बोल रहा है और झूठ कौन। पुलिस सूत्रों के मुताबिक सभी मामलों में जांच के बाद रिपोर्ट कोर्ट में सौंपी जाएगी और कोर्ट अंतिम फैसला सुनाएगा।