नाटकों में अपनी प्रतिभा के झंडे गाड़ने वाली कारगिल की नन्ही आसमा गुल ने नया इतिहास रचा है। नटरंग की ओर से आयोजित होने वाले बच्चों के वार्षिक थिएटर में ‘पार्टी तो बनती है’ नाटक में अपनी कला का प्रदर्शन करने वाली चौथी क्लास की आसमा ‘दादी मां की कहानी’, ‘बीरबल की खिडी’ और ‘लाख की नाक’ जैसे नाटकों में दर्शकों को अपने अभिनय से आकर्षित कर चुकी है।
छोटी उम्र में उसकी प्रतिभा को देखते हुए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सेंटर फार कल्चरल रिर्सोसेज एंड ट्रेनिंग की ओर से उसे थिएटर के क्षेत्र में नेशनल स्कालरशिप प्रदान की गई है। ताकि वह थिएटर डायरेक्टर पद्मश्री बलवंत ठाकुर की देखरेख में प्रशिक्षण प्राप्त कर सके। यह स्कालरशिप पाने वाली आसमा कारगिल की पहली बच्ची है। इसके लिए देशभर से हजारों युवा कलाकारों ने अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित प्रतियोगिता में भाग लिया।
इक्का दुक्का लोगों को मिलने वाली इस स्कालरशिप के तहत आसमा गुल को प्रत्येक वर्ष 12,600 रुपये मिलेंगे और यह उसकी 20 साल की उम्र होने तक मिलती रहेगी। बलवंत ठाकुर ने कहा कि आसमा ने गौरवपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इससे थिएटर में काम करने वाले रियासत के अन्य युवा कलाकारों को प्रोत्साहन मिलेगा। जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर ऊंचाइयां हासिल करने के लिए प्रयासरत हैं।
रियासत के दूरदराज इलाके से आकर इस उपलब्धि को हासिल कर आसमा ने साबित किया कि इरादे नेक हो तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कारगिल निवासी अब्दुल गफ्फार जरगर और हावा बी की लाडली विश्व में रियासत का नाम रौशन करने में कामयाब होगी।