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कारगिल गाथा: लौटने को मजबूर हो गई पाकिस्तानी सेना

Mon, 11 Jul 2016 12:47 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
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- फोटो : ADGPI
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दो महीने से भी लंबे समय तक चलता रहा युद्ध अपने तीसरे और आखिरी पड़ाव पर पहुंच गया था। युद्ध विराम की घोषणा के बावजूद ऊंचाई वाले सामरिक इलाकों से दुश्मन इक्का दुक्का गोले बरसा रहा था। हालांकि 10 जुलाई आने तक हालात कमोबेश पहले से शांत हो गए। 
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भारतीय सेना ने काकसर सब सेक्टर की चोटियों सहित प्वाइंट 5605, प्वाइंट 5280 और स्पर जंक्शन को दुश्मन से खाली करवाने के लिए खास आपरेशन चलाया। युद्ध विराम की घोषणा के चलते 5 जुलाई 1999 से चलाए गए ऑपरेशन को जुलाई के दूसरे सप्ताह में तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा था। 

नौ जुलाई की रात से घुसपैठिए और पाकिस्तानी सेना की टुकड़ियों ने काकसर सब सेक्टर से वापस लौटना शुरू कर दिया। दस जुलाई की सुबह तक ये प्रक्रिया जारी रही। भारतीय सेना ने इसी दिन काकसर सब सेक्टर की ऊंची चोटियों को पूरी तरह से खाली करवाकर फिर से अपना कब्जा स्थापित कर लिया। 
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पाकिस्तान की सेना हटना शुरु किया

- फोटो : ADGPI
इससे एक दिन पहले ही बटालिक सब सेक्टर के प्वाइंट 5285, जुबार जंक्शन और कुकरठंग चोटियों की शृंखला पर फिर से कब्जा हासिल करने के लिए 17 गड़वाल राइफल्स ने हमले की मुद्रा में ताबड़तोड़ गोलाबारी की। प्वाइंट 5285 पर भारतीय सेना की पकड़ बनते देख दुश्मन ने भीषण गोलाबारी की। इसके बावजूद बटालियन ने अपने लक्ष्य को हासिल करते हुए प्वाइंट 5285 को फतह कर तिरंगा लहरा दिया।

युद्ध विराम की घोषणा पर शुरुआत में अमल से कन्नी काट रही पाकिस्तानी सेना को भारतीय इलाके छोड़ने को मजबूर होना पड़ा। बटालिक सब सेक्टर और काकसर सब सेक्टर के बाद 11 जुलाई को बटालिक सेक्टर के शेष हिस्साें से भी पाकिस्तान की सेना हटना शुरु हो गई। 
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