ज्यौड़ियां। कारगिल युद्ध को 26 साल हो चुके हैं परंतु छंब विधानसभा के कोढेवाला और नाईवाला विस्थापित कॉलोनियों में रह रहे सीमावर्ती गांवों के लोग आज भी उसी दर्द, उसी उपेक्षा और उसी असुरक्षा में जीने को मजबूर हैं।
बता दें कि 1999 में पलांवाला सेक्टर में लगातार गोलाबारी के बीच सरकार ने छंब विधानसभा के सामोआ, चपरेयाल, सैंथ, हमीरपुर सिद्धड़, घिगड़ेयाल, बदोवाल, पलातन, पंजतूत सहित कई गांवों के परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर बसाया था। साथ ही प्रत्येक परिवार को 5 मरले का प्लॉट और 50,000 रुपये मकान निर्माण सहायता दी गई थी। प्रशासनिक पिंग–पॉन्ग में पिस रहे कॉलोनी के लोग बताते हैं कि खौड़ में कहो तो जवाब : यह अखनूर का क्षेत्र है। अखनूर में कहो तो जवाब : ये लोग खौड़ क्षेत्र के हैं। इस खींचतान में सबसे ज्यादा नुकसान उन परिवारों का हो रहा है जो देश की सुरक्षा के लिए अपने घर-आंगन छोड़कर यहां आए थे।विकास का नाम तक नहीं-सिर्फ गंदगी और उपेक्षा। लोगों के अनुसार कॉलोनी की नालियां और गलियां आज तक कच्ची हैं। शौचालय निर्माण अधूरा है और कहीं भी पक्की सड़क नहीं है।
पूर्व सरपंच अनुराधा शर्मा, सोनू शर्मा, कृष्ण लाल, सोनू कुमार, अंजु बाला, आरती देवी, प्रिया देवी और केवल कुमार ने बताया कि जब हमें यहां बसाया गया था, तब वादा किया गया था कि कॉलोनी के अंदर ही चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा, बिजली, पानी, पक्की सड़कें-गलियां और शौचालय दिए जाएंगे। मगर आज तक इनमें से अधिकांश वायदे अधूरे हैं। 1999 के बाद से राशन कार्ड भी नहीं बना, सरपंच अनुराधा शर्मा ने बताया कि हमारे गांव के किसी भी परिवार का नया राशन कार्ड नहीं बना। इसकी वजह से लोग कई सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। सरकार और प्रशासन को तुरंत संज्ञान लेकर इन विस्थापित परिवारों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए।