जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने हंदवाड़ा में सेना के जवान द्वारा कथित छेड़छाड़ और बाद में हुई हिंसा में पांच लोगों के मारे जाने की घटना की न्याययिक जांच वाली जनहित याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह याचिका कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से दायर की गई है।
जस्टिस अली मोहम्मद मागरे और जस्टिस ताशी राबस्तान की डीविजन बेंच में सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल डीसी रैना ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि लड़की को 149 के तहत सुरक्षा के लिहाज से रखा गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स को ऐसे मामलों में आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता बार के अध्यक्ष मियां कयूम ने कहा कि लोगों को सरकार द्वारा करवाई जा रही जांचों पर भरोसा नहीं है, इसलिए पूरे मामले की न्यायिक जांच जरूरी है।
साथ ही उन्होंने लड़की के बयान वाले वीडियो के एक बार फिर वायरल होने पर अपना विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि जिनके खिलाफ शिकायत है वे जांचकर्ता नहीं बन सकते। दोनों पक्षों को सुनने के बाद बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
लड़की की मां की याचिका पर सुनवाई दो मई को
लड़की की मां की याचिका पर सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने दो मई की तिथि तय की है। उसकी मां ने याचिका में कहा है कि उसकी बेटी और पति को पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में रखा है।
लड़की की मां के वकील परवेज़ इमरोज़ ने बताया कि पुलिस का कहना है कि लड़की प्रोटेक्टिव कस्टडी में है। लड़की को सुनवाई के दौरान यहां आना था और महिला आयोग भी जाना था, लेकिन उसे आने नहीं दिया गया। अभी भी लड़की से किसी को मिलने नहीं दिया जा रहा। इमरोज़ के अनुसार लड़की को बयान पर कायम रहने के लिए धमकाया जा रहा है।