पहलगाम आतंकी हमले के बाद देश की सुरक्षा रणनीति में हुए बदलावों की समीक्षा के लिए मई के पहले सप्ताह जयपुर में तीनों सेनाओं का संयुक्त कमांडर सम्मेलन आयोजित होगा। इस बैठक में आतंकवाद से निपटने की तैयारियों, भविष्य की चुनौतियों और सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की दिशा में रणनीतिक चर्चा की जाएगी।
देश की तीनों सेनाओं का संयुक्त सम्मेलन मई के पहले सप्ताह जयपुर में प्रस्तावित है। इसमें पहलगाम आतंकी हमले के बाद देश की सुरक्षा रणनीति में क्या बदलाव आया और पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद से निपटने के लिए सेनाएं किस तरह से खुद को तैयार कर रही हैं, इन सब पर मंथन होगा। संयुक्त कमांडर बदली गई सुरक्षा रणनीति व तैयारियां परखेंगे।
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सेना के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक हर वर्ष यह सुयंक्त कमांडर सम्मेलन होता है। इस साल ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरा होने की थीम पर इसे समर्पित किया गया है। सूत्रों के अनुसार सम्मेलन में थल सेना, वायु सेना और नौसेना के शीर्ष कमांडरों के शामिल होने की उम्मीद है।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक को संबोधित कर सकते हैं। यह सम्मेलन सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने तथा भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाने वाला माना जा रहा है।
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घुसपैठ, हथियार और तस्करी चुनौती
यह सम्मेलन इसलिए भी अहम है कि जम्मू-कश्मीर सुरक्षा के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील है। सीमाएं शांत हैं लेकिन बीच-बीच में घुसपैठ की कोशिशें जारी रहती हैं। हथियारों व नशीले पदार्थों की तस्करी के मामलों में भी वृद्धि देखी गई है जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती है।
मई के पहले सप्ताह में रक्षा प्रौद्योगिकी में जुटेंगे विशेषज्ञ
रक्षा प्रौद्योगिकी व नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘उत्तर टेक संगोष्ठी 2026’ चार से छह मई तक प्रयागराज में होगी। इसमें देशभर में रक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रमुख संस्थान व उद्योग भाग लेंगे। जम्मू-कश्मीर के लिहाज से यह प्रदर्शनी और भी खास है क्योंकि इसका आयोजन सेना की नॉर्दर्न व सेंट्रल कमांड कर रही हैं। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीकों को प्रोत्साहित करना, उद्योग और सेना के बीच सहयोग को मजबूत करना और नए नवाचारों को एक साझा मंच प्रदान करना है।