- जेकेएसएस के प्रयास से जोगी गेट श्मशान घाट में आएगी 4.50 लाख की मशीन
जम्मू। पंजाब की तर्ज पर जम्मू में गोबर से बनी सुगंधित समिधा (उपलों) से अंतिम संस्कार होगा। जम्मू-कश्मीर सेवा समिति (जेकेएसएस) ने जोगी गेट श्मशान घाट पर प्राचीन परंपरा को जीवंत करने की पहल की है।
परियोजना पर करीब दस लाख रुपये खर्च होंगे। इसमें 4.50 लाख रुपये की मशीन पंजाब से आएगी। समिति के प्रधान सुमित सारन का कहना है कि धार्मिक ग्रंथों में गाय को माता का दर्जा दिया गया है और उसके गोबर को पवित्र, शुद्ध एवं वातावरण को सात्विक करने वाला माना गया है। गोबर से बने उपलों का प्रयोग सदियों से यज्ञ, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों में हो रहा है। अब उसी परंपरा को जीवंत करने के लिए समिति की ओर से पहल की जा रही है।
इसके लिए सदस्यों ने पंजाब के जालंधर, बठिंडा, लुधियाना, हरियाणा व दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों का दौरा किया। इस दौरान पंजाब में शव के अंतिम संस्कार में ऐसे प्रयोग दिखाई दिए जिससे प्रभावित होकर समिति ने जम्मू में अपनी तरह की नई सुविधा उपलब्ध कराने का फैसला किया है। यह कोई नया प्रयोग नहीं, बल्कि प्राचीन सनातन परंपराओं की आधुनिक समय में वापसी है। आने वाले समय में विभिन्न श्मशान घाटों में चरणबद्ध तरीके से प्लांट को स्थापित करने की योजना है। संत समाज और धार्मिक संगठनों ने अनूठे प्रयास का स्वागत किया है।
पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
महासचिव अजय बताते हैं कि गोबर से बनी सुगंधित समिधा दाह संस्कार के दौरान कम धुआं उत्पन्न करती है, जिससे वातावरण शुद्ध रहता है। लकड़ी का प्रयोग काफी कम होने से वन संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। पेड़ों के कटान पर रोक लगेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गोबर की सुगंध से वातावरण शुद्ध होगा।
अंबफला व नगरोटा गोशाला से लाएंगे गोबर
महासचिव अजय के अनुसार उपला बनाने के लिए अंबफला व नगरोटा गोशाला से गाय का गोबर लाया जाएगा। समिति की गाड़ियां गोबर एकत्रित करने का काम करेंगी। सुगंधित उपलों को बनाने के लिए गोबर में धूप, कपूर, तेल व शवों को जलाने वाली उपयोगी सामग्री मिलाई जाएगी।