जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) प्रमुख यासीन मलिक पर सरकार ने पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) लगाया है। वह 22 फरवरी से श्रीनगर के कोठी बाग थाने में बंद था। अब उसे जम्मू की कोटभलवाल जेल ले जाया गया है। इसके साथ ही जमात-ए-इस्लामी के मुख्य प्रवक्ता एडवोकेट जाहिद अली पर भी पीएसए लगाया गया है।
यासीन मलिक को वीरवार को आर्म्ड पर्सनल कैरियर (एपीसी) वाहन से श्रीनगर से जम्मू तक के लिए उन्हें विशेष सुरक्षा कवच के दायरे में भेजा गया। यासीन को जम्मू ले जाने की खबर फैलते ही लाल चौक से सटे मायसूमा इलाके में दुकानें, कारोबारी संस्थान आदि बंद हो गए और तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई।
हालात को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई। इस बीच हुर्रियत (एम) के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने इसकी निंदा करते हुए ट्वीट किया कि यासीन मलिक और अन्य लोगों पर सरकार द्वारा पीएसए लगाने और उन्हें कोट भलवाल ले जाने की निंदा करते हैं। यह गैरकानूनी और अलोकतांत्रिक रणनीति लोगों और उनके नेतृत्व को कश्मीर मामले के शांतिपूर्ण समाधान की मांग करने से रोक नहीं सकेगी।
लंबे समय तक सलाखों के पीछे रह सकता है यासीन
सूत्रों के अनुसार यासीन लंबे समय तक सलाखों के पीछे रह सकता है। क्योंकि सीबीआई की तरफ से पूर्व गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया सईद के अपहरण तथा वायुसेना के पांच जवानों की हत्या जैसे मामले दोबारा खोलने की चीफ जस्टिस के सामने याचिका दायर की गई है। इस मामले में मलिक को जवाब के लिए एक दिन का समय दिया गया है। अगली सुनवाई 11 मार्च को है। ऐसे में इतनी जल्दी जवाब तैयार कर पाना मुश्किल है।
अलगाववादियों ने आज बंद का किया आह्वान
इस बीच अलगाववादियों के जेआरएल द्वारा शुक्रवार को मलिक पर पीएसए और जमात पर प्रतिबंध के खिलाफ कश्मीर बंद का आह्वान किया गया है। लोगों से इस बंद का समर्थन करने की अपील की गई है।