कश्मीर घाटी में तेल की धार रुक गई है। ऑयल टैंकर चालकों ने घाटी में जाने से इनकार कर दिया है।
घाटी में टैंकर चालकों पर लगातार पथराव और ड्राइवरों की बेरहमी से पिटाई के बाद आयल टैंकर संचालकों का गुस्सा भड़क उठा।
आज टैंकर संचालकों ने तेल से भरे टैंकर घाटी ले जाने से इंकार कर दिया।
सुबह नरवाल स्थित आयल डिपो के बाहर सैकड़ों टैंकर खड़े रहे और एक भी टैंकर आयल लेने के लिए डिपो के अंदर नहीं गया।
रोज जाते थे 500 टैंकर
प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंच टैंकर संचालकों को आश्वासन दिया, लेकिन वे बिना सुरक्षा घाटी जाने को तैयार नहीं हुए।
जेएंडके आयल टैंकर आनर एसोसिएशन के प्रेसीडेंट अनान शर्मा ने कहा कि घाटी में बेवजह उनके टैंकरों को तोड़ा जा रहा है।
ड्राइवरों की बेरहमी से पिटाई की जा रही है। प्रशासन दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।
ऐसे में ड्राइवरों की जान पर खेल हम घाटी में आयल सप्लाई नहीं कर सकते। उल्लेखनीय है कि पांच सौ से ज्यादा टैंकर रोजाना आयल लेकर कश्मीर और लद्दाख जाते हैं।
काजीगुंड में फिर टैंकर चालकों पर हमला
टैंकर आनर एसोसिएशन के साथ बातचीत करने पहुंचे असिस्टेंट डेवलपमेंट कमिश्नर, एसपी साउथ और नायब तहसीलदार ने आश्वासन दिया कि घाटी में उग्र भीड़ के हमले में जख्मी होने वाले ड्राइवरों को आर्थिक मदद दी जाएगी।
लेकिन एसोसिएशन बिना सुरक्षा घाटी जाने को तैयार नहीं है। प्रेसीडेंट शर्मा ने कहा कि प्रशासन रेड क्रास की मद से ड्राइवरों को आर्थिक मदद देने को तैयार हुआ है, लेकिन कल काजीगुंड में फिर टैंकर चालकों पर हमला हुआ।
प्रशासन के प्रस्ताव को एसोसिएशन ने स्वीकार नहीं किया। घाटी में टैंकर अब सुरक्षा मिलने पर ही जाएंगे। एसोसिएशन द्वारा हड़ताल समाप्त करने से इंकार करने के बाद अब शुक्रवार की सुबह डिवीजनल कमिश्नर के साथ बैठक रखी गई है।
जिसमें घाटी में टैंकर भेजने पर फैसला होगा।