जेएंडके हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एन पाल वसंथाकुमार ने कहा कि जब सरकार किसी मुद्दे पर विफल होती है तो न्यायपालिका को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 38 मोबाइल कोर्ट स्थापित करने की मंजूरी मिली थी, लेकिन, उसका अनुपालन नहीं हुआ।
सुप्रीम कोर्ट को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा और दो दिन पहले इन मोबाइल कोर्ट की स्थापना को मंजूरी दे दी गई। मुख्य न्यायाधीश ‘असंगठित क्षेत्र के मजदूरों’ पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
वसंथाकुमार ने कहा कि वर्कशाप का उद्देश्य तभी सफल होगा, जब समाज का हर वर्ग मजदूरों के विकास के लिए आगे आएगा। इस मामले में हर अफसर को घर से शुरुआत करनी होगी। अपने रसोइए, ड्राइवर, माली को वह अधिकार देने होंगे, जिनके वह हकदार हैं।
वर्कशाप के समापन समारोह में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस और नालसा (नेशनल लीगल सर्विसेज अथारिटी) के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन जस्टिस अनिल आर दवे ने कहा कि लीगल सर्विसेज अथारिटी अपनी भूमिका निभा रही है।
अथारिटी ने इस तरह के कार्यक्रम के जरिए हार्न बजा दिया है। अब मजदूरों को अपने हकों के लिए आगे आना होगा। उन्होंने लोगों से कहा कि अपने मजदूरों को खुश रखें, तभी वह आपके काम में अच्छा परिणाम दे सकते हैं। वह खुश नहीं होंगे तो अच्छी तरह से काम को अंजाम भी नहीं देंगे।