जिले में एक साल से अधिक समय से रह रहे लोगों का नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए तहसीलदारों को मौके पर आवास प्रमाणपत्र बनाने का उपायुक्त का आदेश विपक्ष के भारी दबाव के बीच 24 घंटे में ही वापस ले लिया गया। दरअसल मंगलवार को आदेश जारी किया गया था कि एक साल से अधिक समय से रह रहे लोगों को संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार मौके पर जाकर सत्यापन करने के बाद आवास प्रमाण पत्र जारी करें।
डीसी ने आदेश में कहा था कि चुनाव आयोग ने पानी, बिजली तथा गैस कनेक्शन की रसीद, आधार कार्ड, पास बुक, पासपोर्ट, भूमि रिकॉर्ड-किसान बही, किरायेनामा तथा घर की बिक्री का डीड मतदाता बनने के लिए आवश्यक दस्तावेज बताया है। हालांकि, इसमें कहा गया है कि वोटर के रूप में पंजीकरण के लिए आवास के अन्य सबूत भी मान्य होंगे।
यह भी निर्देश है कि यदि ऊपर वर्णित कोई दस्तावेज न हो तो मौके पर जाकर सत्यापन करना जरूरी है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई भारतीय नागरिक बेघर है और अस्थायी निवास का कोई दस्तावेज नहीं है तो अधिकारी मौके पर जाकर सत्यापन करेगा।
आदेश में कहा गया है कि पंजीकरण में लगे अधिकारियों ने यह महसूस किया कि कई योग्य मतदाता उपरोक्त दस्तावेजों के न होने से काफी परेशानी महसूस कर रहे हैं। इस वजह से तात्कालिक आवश्यकता को देखते हुए तथा कोई भी योग्य व्यक्ति मतदाता बनने से छूट न जाए, इसे ध्यान में रखते हुए सभी तहसीलदारों को अधिकृत किया जाता है कि वे एक साल से अधिक समय से रह रहे लोगों को मौके पर सत्यापन करते हुए आवास प्रमाणपत्र जारी करें।
चुनाव कार्यालय से जुड़े सूत्रों ने बताया कि चुनाव आयोग की ओर से ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया गया है कि एक साल से रह रहे लोगों को आवास प्रमाणपत्र जारी किया जाए। मतदाता के रूप में पंजीकृत होने के लिए सात तरह के दस्तावेज बिजली, पानी व गैस कनेक्शन, आधार कार्ड, पासबुक-पोस्ट आफिस खाता, पासपोर्ट,किसान बही-राजस्व विभाग का भूमि दस्तावेज, पंजीकृत किरायानामा व पंजीकृत सेल डीड जरूरी हैं। माना जा रहा है कि डीसी के आदेश की रिपोर्ट का चुनाव आयोग ने भी संज्ञान लिया। इसके बाद आदेश को वापस लेने का फैसल किया गया।