जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण में 15 सीटों पर चुनाव लड़ने जा रहे अधिकतर उम्मीदवार दसवीं पास भी नहीं हैं। जनता ऐसे लोगों में से अपना नुमाइंदा चुनेगी जो स्कूल की पढ़ाई भी पूरी नहीं कर सके। चुनाव लड़ने जा रहे प्रत्याशियों में से 67 प्रतिशत ऐसे हैं जो स्कूल ड्रापआउट हैं।
घाटी के उम्मीदवारों के घोषणापत्र का अध्ययन करने पर पता चलता है कि चुनाव में खड़े हो रहे पचास प्रतिशत यानी 16 प्रत्याशी केवल आठवीं पास हैं, जबकि 11 प्रत्याशी हाईस्कूल पास हैं। चुनाव में खड़े हो रहे करीब 32 प्रतिशत प्रत्याशी ही ऐसे हैं जो कॉलेज गए हैं।
गंदरबल
गंदरबल से पीडीपी के उम्मीदवार काजी मोहम्मद अफजल, जो की कांग्रेस-पीडीपी सरकार ( 2008 से 2008 तक) में मंत्री रह चुके हैं ने तो एजुकेशनल क्वालीफिकेशन का कॉलम ही खाली छोड़ दिया है। जबकि अफजल को टक्कर दे रहे कांग्रेसी उम्मीदवार मोहम्मद यूसुफ भट्ट रात्रि पाठशाला में हाईस्कूल तक पढ़ें हैं।
कंगन
कंगन सीट के उम्मीदवारों की बात की जाए तो साल उम्मीदवार ऐसे हैं जो आठवीं या इससे कम योग्यता रखते हैं, इन सात के अलावा बाकी तीन उम्मीदवार ग्रेजुएट हैं। कंगन सीट पर नेकां के मियां अलताफ अहमद (एलएलबी) और पीडीपी के बशीर अहमद मीर (ग्रेजुएट) के बीच है।
बांदीपोरा
बांदीपोरा सीट पर छह प्रत्याशी ऐसे हैं जो हाईस्कूल भी पास नहीं कर सके जबकि दो प्रत्याशी ग्रेजुएट हैं।
सोनावारी
सोनावारी सीट पर एक ग्रेजुएट प्रत्याशी चनाव में खड़ा हुआ है।
गुरेज
भारत-पाक सीमा से लगी हुई गुरेज सीट इस मामले में अहम है। उम्मीद के उलट यहां से चुनाव में खड़े हो रहे चार प्रत्याशियों में से तीन ग्रेजुएट हैं जबकि एक हाईस्कूल पास है।
बता दें कि घाटी की गुरेज, बांदीपोरा, सोनावारी, गंदरबल और कंगन सीट पर प्रथम चरण में 25 नवंबर को मतदान होना है।