अपनी पार्टी के प्रमुख अल्ताफ बुखारी एवं अन्य
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कश्मीर की राजनीति में पहली बार लोकसभा चुनाव में उतरी अपनी पार्टी का प्रदर्शन उसकी उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा है। कश्मीर संभाग की तीन संसदीय सीट में दो पर चुनावी मैदान में उतरी अपनी पार्टी को अपने पहले ही चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। अनंतनाग-राजोरी संसदीय सीट से पार्टी के उम्मीदवार जफर इकबाल खान मन्हास और श्रीनगर संसदीय सीट से मोहम्मद अशरफ मीर चुनावी मैदान में थे। दोनों उम्मीदवार को कुल मिलाकर 207270 वोट मिले हैं।
अनंतनाग-राजोरी सीट से अपनी पार्टी के उम्मीदवार जफर इकबाल चौधरी खुद पहाड़ी समुदाय से आते हैं। इस सीट पर भाजपा की तरफ से अपना प्रत्याशी नहीं उतारे जाने के बाद अपनी पार्टी को एक आशा की किरण दिखी थी। जफर इकबाल मन्हास को पर्दे के पीछे से भाजपा का पूरा समर्थन था। भाजपा नेता उनके समर्थन के लिए प्रचार करते भी दिखे।
हालांकि उनका मुकाबला पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और नेशनल कांफ्रेंस के बड़े नेता मियां अल्ताफ अहमद से था। ऐसे में उनके लिए यहां से जीत हासिल करना शुरू से ही बड़ी चुनौती थी। इस सीट से जफर इकबाल मन्हास 1.41 लाख से अधिक वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे हैं। उन्हें करीब 13 फीसदी वोट मिले हैं।
वहीं श्रीनगर संसदीय सीट से अपनी पार्टी ने मोहम्मद अशरफ मीर को चुनावी मैदान में उतारा था। उनका मुकाबला नेशनल कांफ्रेंस के उम्मीदवार अगा सैय्यद रुहुल्ला और पीडीपी के उम्मीदवार वहीद उर रहमान पारा के साथ था। अपनी पार्टी के उम्मीदवार मोहम्मद अशरफ मीर को 65954 यानी 9.77 फीसदी वोट मिले।
वह श्रीनगर संसदीय सीट पर तीसरे स्थान पर रहे। लोकसभा चुनाव के इस अभियान के दौरान अपनी पार्टी कश्मीर में महबूबा मुफ्ती और फारुख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला की वंशवादी राजनीति पर ही हमलावर रहे। अपने पहले चुनाव में पार्टी को इस प्रदर्शन से ज्यादा बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी।