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Srinagar: जम्मू-कश्मीर बनेगा ज्ञान और संस्कृति का राष्ट्रीय केंद्र, चिनार बुक फेस्टिवल में बोले- एलजी सिन्हा

Sat, 18 Jul 2026 04:56 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

चिनार बुक फेस्टिवल में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि सरकार का लक्ष्य जम्मू-कश्मीर को ज्ञान, संस्कृति और रचनात्मकता का राष्ट्रीय केंद्र बनाना है।
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श्रीनगर बुक फेस्टिवल - फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को श्रीनगर में आयोजित तीसरे चिनार बुक फेस्टिवल में हिस्सा लिया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि किताबें केवल पढ़ने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे विचारों से संवाद करने, नई सोच विकसित करने और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा देती हैं।

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श्रीनगर बुक फेस्टिवल - फोटो : बासित जरगर
उन्होंने कहा कि चिनार बुक फेस्टिवल सिर्फ एक साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि पढ़ने-लिखने और विचारों के आदान-प्रदान की संस्कृति को बढ़ावा देने वाला एक जन आंदोलन बन चुका है। इसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को ज्ञान, संस्कृति और रचनात्मकता का राष्ट्रीय केंद्र बनाना है।

श्रीनगर बुक फेस्टिवल - फोटो : बासित जरगर
उपराज्यपाल ने युवाओं से रोज़ पढ़ने की आदत विकसित करने की अपील करते हुए कहा कि साहित्य समाज को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि किताबें हमें अलग-अलग संस्कृतियों, भाषाओं और विचारों को समझने तथा उनका सम्मान करना सिखाती हैं। साथ ही, लुप्त होती भाषाओं और लिपियों को संरक्षित करने में भी साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका है।

श्रीनगर बुक फेस्टिवल - फोटो : बासित जरगर
मनोज सिन्हा ने कहा कि कम समय में ही चिनार बुक फेस्टिवल जम्मू-कश्मीर में बौद्धिक जागरूकता का बड़ा मंच बन गया है। उन्होंने लेखकों और चिंतकों की तुलना चिनार के पेड़ से करते हुए कहा कि जैसे चिनार धैर्य, सुंदरता और स्थायित्व का प्रतीक है, वैसे ही लेखक और उनकी रचनाएं समाज को नई दिशा देने का काम करती हैं।

श्रीनगर बुक फेस्टिवल - फोटो : बासित जरगर
उन्होंने इस दौरान शारदा लिपि के पुनर्जीवन और 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के तहत तमिल-कश्मीरी संवाद जैसी पहलों की भी सराहना की। यह महोत्सव देश के अलग-अलग क्षेत्रों, भाषाओं और पीढ़ियों को जोड़ने का सशक्त माध्यम बन गया है।
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श्रीनगर बुक फेस्टिवल - फोटो : बासित जरगर
उपराज्यपाल ने कहा कि किसी पुस्तक मेले की सफलता केवल किताबों की बिक्री से नहीं आंकी जानी चाहिए। यदि यहां शुरू हुई चर्चा किसी विश्वविद्यालय तक पहुंचे, नए विचारों को जन्म दे या किसी युवा के जीवन की दिशा बदल दे, तो यही इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
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