घाटी में कार्यक्रम के दौरान एलजी सिन्हा।
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प्रकृति के बिना जीवन संभव नहीं है। विश्व पर्यावरण दिवस हमें जीवन शैली में परिवर्तन लाने की याद दिलाता है। जंगल, नदियां, झीलों, पहाड़ों, घास के मैदानों और शहरों को प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त करना सबकी प्राथमिकता होनी चाहिए। जलवायु परिवर्तन को रोकने और जैव विविधता के नुकसान को कम करने में यह दशक अधिक महत्वपूर्ण है।
यह बातें उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को श्रीनगर में वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण विभाग की ओर से विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही। उन्होंने कहा कि पर्यावरण दिवस पर हमारा संकल्प प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्ति है।
जनभागीदारी की भावना के माध्यम से इस संकल्प को पूरा करना अब पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने इसके लिए यूटी प्रशासन की प्रतिबद्धता को भी दोहराया। उपराज्यपाल ने कहा कि 2040 तक हम सर्कुलर इकॉनमी की रणनीति अपनाकर ही प्लास्टिक प्रदूषण को 20 प्रतिशत तक कम कर पाएंगे।
इस तरह के परिवर्तन से रोजगार के अवसर पैदा करने का भी सुझाव दिया। जम्मू-कश्मीर में जी20 टूरिज्म मीट के सफल आयोजन पर कहा कि इस ऐतिहासिक घटना ने यूटी को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर रखा है।
उन्होंने कहा कि बर्फ से ढके पहाड़ों, समृद्ध जंगलों, घास के मैदानों, झीलों और जलधाराओं की हमारी प्राकृतिक विरासत को जलवायु परिवर्तन के खतरों से बचाने की जरूरत है। हम वास्तव में भाग्यशाली हैं कि प्रकृति ने हमें इतना सब कुछ दिया है। हमारा कर्तव्य है कि हम प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करें।
हरित प्रौद्योगिकी अपनाएं लोग: मुख्य सचिव
इस मौके पर श्रीनगर के मेयर जुनैद अजीम मट्टू ने शहर में हरियाली बढ़ाने के निगम के वन सोल वन ट्री मिशन पर बात की। मुख्य सचिव डॉ. अरुण कुमार मेहता ने लोगों से स्थायी जीवन शैली और हरित प्रौद्योगिकी अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोग जम्मू को कचरा मुक्त बनाने के लिए सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग बंद कर दें।