बिजली उत्पादन, अतिक्रमण हटाओ अभियान और संपत्ति कर पर कुछ लोगों ने प्रदेश की जनता को गुमराह करने की कोशिश की है। जो लोग कर देने में सक्षम हैं, वही दूसरों को उकसा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर की एक बड़ी आबादी कर के दायरे में नहीं आ रही है।
उप राज्यपाल ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में तीस हजार से अधिक सरकारी पदों को भरा गया है। अगले 3-4 माह में और 20 हजार पद विज्ञापित किए जाएंगे। सरकारी नौकरियों में जिन लोगों ने गलत किया है, उनके खिलाफ संविधान और कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है। कई मामले सीबीआई के पास हैं।
उप राज्यपाल ने दावा किया कि दो साल में 66000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। पिछले छह माह में हर दिन एक औद्योगिक व्यावसायिक इकाई ने अपना संचालन शुरू किया है। उद्योगों के लिए अधिक भूमि विकसित की जा रही है। नई औद्योगिक नीति का जम्मू कश्मीर के लोग भी अधिक से अधिक लाभ लें। अगले पांच वर्ष कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के विस्तार किया जा रहा है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए भूमि को द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स आफ इंडियट् की मांग पर उपराज्यपाल ने कहा कि इस उद्देश्य के लिए भूमि आवंटित की जाएगी।
उप राज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के शहरी क्षेत्र में 520000 घर हैं। इनमें से 206000 घर 1000 वर्ग फुट से कम हैं यानी उन पर कोई संपत्ति कर नहीं लगेगा। शहरों, ग्रामीण और धार्मिक स्थलों में 40 प्रतिशत आबादी पर कोई कर नहीं होगा।
203600 घर 1500 वर्ग फुट से कम के हैं और इनमें से 80 प्रतिशत परिवारों को प्रति वर्ष 600 रुपये से कम का भुगतान करना होगा। यह राशि शिमला, अंबाला और देहरादून की तुलना में 10वां हिस्सा है। शहरी क्षेत्रों में 101000 में से 46000 दुकानें 100 वर्ग फुट से कम की हैं और उन्हें 700 रुपये प्रति वर्ष का भुगतान करना होगा।
इन दुकानों में 80 प्रतिशत को मामूली 600 रुपये प्रति वर्ष और 50 रुपये प्रति माह का भुगतान करना होगा। 30000 दुकानों को 2000 रुपये प्रति वर्ष से कम कर का भुगतान करना होगा और इनमें 20000 को 1500 रुपये से कम का भुगतान करना होगा। यह राजस्व सीधे नगर पालिकाओं और निगमों के खाते में जाएगा।