जिला उपायुक्त कार्यालय की ओर से गन लाइसेंस देना बंद कर दिया गया है, लेकिन अगर किसी प्रभावी व्यक्ति की सिफारिश लेकर जाएं तो गन लाइसेंस मिलने की उम्मीद की जा सकती है।
डीसी आफिस में सिफारिश करने वालों का बोलबाला है। विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए अधिकतर लोगों ने डिजिटाइजेशन के लिए भी रुचि नहीं दिखाई है। 15 हजार लोगों में से मात्र ढाई हजार गन लाइसेंस धारकों ने ही फार्म भरे हैं।
जम्मू एंड कश्मीर में एक लाख से ज्यादा लोगों के पास गन लाइसेंस है। गन लाइसेंस धारकों का रिकार्ड आन लाइन करने के लिए दो माह से गन लाइसेंस डिजिटाइजेशन का काम किया जा रहा था, ताकि किसी भी व्यक्ति का रिकार्ड खंगालने में मुश्किल न हो।
31 अक्तूबर तक यह प्रक्रिया जारी थी। इसके बाद यह बंद कर दी गई। इसके साथ ही गन लाइसेंस जारी करना भी बंद कर दिया गया। गन लाइसेंस के लिए डीसी आफिस में लोग भटक रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
ऐसे में लोगों ने भी डिजिटाइजेशन के प्रति रुचि कम कर दी है। जम्मू की बात करें तो 15 हजार के करीब लोगों के पास गन लाइसेंस हैं, लेकिन डिजिटाइजेशन के लिए अभी तक मात्र ढाई हजार लोगों ने ही आवेदन किए हैं, जिनका रिकार्ड आनलाइन किया जा रहा है।