प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि अलगाववादी का समूह किसी सैद्धांतिक प्रतिबद्धता के कारण नहीं, बल्कि सुविधाओं के लिए अलगाववादी बने हैं। कश्मीर में अलगाववाद एक सियासी संस्कृति बन गई है।
कश्मीर में मुख्यधारा के राजनीतिक दलों ने भी एक कला विकसित कर ली है, जिसके तहत वे अपनी सुविधा के अनुसार अलगाववादी और सेमी अलगाववादी समूहों का सियासी फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं। पीएमओ राज्य मंत्री ने कश्मीर पर एक विमर्श के दौरान दिल्ली में कहा कि कश्मीर के दो पूर्व मुख्यमंत्री ऐसे हैं जो जब सत्ता में थे तब कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताते थे।
सत्ता से बाहर होने के बाद अब वे कश्मीर को विवाद का मुद्दा बताने लगे हैं। सत्ता से बाहर होते ही उन्हें नया ज्ञान प्राप्त हो गया है। अधिकांश कथित अलगाववादी नेता भारतीय संविधान द्वारा मिलने वाली हर सुविधाओं और पैकेज का उपभोग करते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से कहते हैं कि उनका संविधान में विश्वास नहीं है। समय आ गया है जब कश्मीर के युवकों को यह तय करना होगा कि वे विकास की मुख्यधारा में पीछे नहीं छूट जाएं।