- झिड़ी में रोज 12 से 15 हजार श्रद्धालु पहुंच रहे माथा टेकने
- दिन बीतने के साथ और गहरी होती जा रही आस्था, बढ़ रहा उल्लास
संवाद न्यूज एजेंसी
मिश्रीवाला। झिड़ी में बाबा जित्तो और बुआ कौड़ी के दर्शन के लिए शुक्रवार चाैथे दिन भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। हर श्रद्धालु की यही अभिलाषा है कि दरबार में हाजिरी लगाए। हर दिन 12 से 15 हजार श्रद्धालु बाबा के दरबार में माथा टेकने पहुंच रहे हैं। झिड़ी मेले में आस्था और उल्लास बढ़ रहा है।
शुक्रवार को लोगों ने अपने परिवारों के साथ माथा टेका और पूर्वजों की ओर से की गई भूल की माफी मांगी। मेले में लगाए गए मौत के कुएं में स्टंटबाजों के करतब देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट रही है। पुरुषों और बच्चों की संख्या अधिक है जो झूलों, सर्कस का खूब लुत्फ उठा रहे हैं। खाने-पीने के स्टॉल पर लोग पकौड़े, चाट, जलेबी का स्वाद चख रहे हैं। मेले में अन्य राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु अब वापस लौटने लगे हैं। झिड़ी मेले का आयोजन हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा से होता है। इसे किसानों की हिम्मत और बलिदान के रूप में मनाने की परंपरा बीते 650 सालों से चली आ रही है।
-
बाबा तालाब में लोगों ने लगाई आस्था की डुबकी
मेले के चौथे दिन भी श्रद्धालुओं में बाबा जित्तो के प्रति आस्था दिखाई। चार नवंबर से लगातार श्रद्धालु बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने आ रहे हैं। लोग बाबा तालाब में डुबकी लगाकर मन्नतें मांग रहे हैं। जम्मू के प्रवीण, आरती शर्मा, नेहा व मंजू ने बताया कि बाबा तालाब में स्नान करने से शरीर के रोग तो दूर होते ही हैं साथ ही साथ मन को भी शांति मिलती है। उनका मानना है कि बाबा तालाब में स्नान करने के बाद जो भी श्रद्धालु बाबा जित्तो से मन्नत मांगता है वह पूरी होती है।
-
खूब भा रहा देसी कचालू और गन्ने का रस
झिड़ी मेले में अन्य राज्यों सहित जम्मू संभाग के लोग खुद को देसी कचालू और गन्ने के रस का आनंद उठाने से नहीं रोक पा रहे। मेला घूमने आई प्रिया और सीमा ने बताया कि खाने-पीने कि चीजें महंगी होती हैं लेकिन हर व्यक्ति जो मेला देखने आया है वो मेला घूमकर खाने-पीने के व्यंजनों का स्वाद भी चखेगा। उन्होंने बताया कि मेले में देसी कचालू का स्वाद ही कुछ अलग होता है जो शहर में नहीं मिलता।
युवाओं ने की खूब खरीदारी
झिड़ी मेले में लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं। युवतियां व महिलाएं मेकअप के साथ-साथ घर की साज-सजावट का सामान खरीद रही हैं। खरीदारी को लेकर युवाओं में भी काफी जोश देखा जा रहा है। मेले में आए युवा रोहित, जगदीश वर्मा, सुमित आदि का कहना है कि वे पिछले 12 सालों से मेले में आ रहे हैं। हर बार झिड़ी से ही वे खेल का सामान जैसे फुटबॉल, बैट, हॉकी और गेंद आदि खरीदते हैं। उन्होंने बताया कि बीते चार दिनों में तीन बार आ चुके हैं। लोग मौत के कुएं का खेल, रेंजर और सुनामी झूले का आनंद ले रहे हैं।