बाबा जित्तो मंदिर के पीछे मैदान पर झूले, फूड कोर्ट और मुख्य स्टेज लगाई जा रही
संवाद न्यूज एजेंसी
मिश्रीवाला। उत्तर भारत के सबसे बड़े मेलों में शुमार झिड़ी मेले के लिए तीन दिन शेष हैं। प्रशासन ने मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। मेले के लिए मैदान और दुकानें सज गई हैं। श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए सड़कों को चकाचक किया गया है। यातायात के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
अन्य राज्यों से श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया है। इस बार मेले में कई बदलाव किए गए हैं जो न केवल स्थानीय दुकानदारों व निवासियों को राहत देंगे बल्कि मेले की सुंदरता में भी चार चांद लगाएंगे। इस बार मेला कृषि भूमि के बजाय बाबा जित्तो मंदिर के पीछे मैदान में होगा। यहीं झूले, फूड कोर्ट और मुख्य स्टेज का निर्माण तेजी से चल रहा है। खुला मैदान होने से सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान उमड़ने वाली भीड़ को पर्याप्त जगह मिलेगी। दर्शक आराम से बैठकर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद ले सकेंगे।
आपात स्थिति में तत्काल मदद
नए स्थान के कारण एंबुलेंस व अन्य आपात वाहन आसानी से मेले में आ-जा सकेंगे। मेले के नए स्थान से कल्याणपुर और पंजोड़, झिड़ी, डब्बे व आसपास के गांवों के लोगों को शहर आने-जाने में कोई परेशानी नहीं होगी। झिड़ी मुख्य चौक पर भीड़ कम रहेगी। इमरजेंसी होने पर वाहनों को निकालना आसान होगा। मेला खत्म होने के बाद भी फायदा मिलेगा। मेले के दौरान 10 दिन आम जनता को कोई असुविधा नहीं होगी।
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आधुनिक यात्री शेड : सुविधा का नया तोहफा
प्रशासन ने झिड़ी चौक पर आधुनिक यात्री शेड का निर्माण कराया है। इसमें बैठने की व्यवस्था के साथ मोबाइल चार्जिंग पॉइंट भी हैं। स्थानीय लोग खुश हैं कि यह सुविधा मेला खत्म होने के बाद भी उपलब्ध रहेगी। अब लोगों को वाहनों का इंतजार करते हुए खड़े रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मेला स्थल से लिंक रोड़ सभी छोटी-बड़ी सड़कों की मरम्मत की गई है। कुछ पर तारकोल डाला गया तो कुछ पर ब्लैक टॉप पैचिंग की गई है। इससे वाहन चालकों और स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली है।
श्रद्धालुओं सहित स्थानीय कलाकारों
ने किए बाबा जित्तो के दर्शन
जम्मू के जाने-माने इन्फ्लुएंसर जानू, चटर बॉक्स से मीनाक्षी भगत, शिवम, डोगरी गायिका सरस भारती और सोनाली डोगरा सहित अन्य राज्यों से आए कई श्रद्धालुओं ने शुक्रवार को बाबा जित्तो के मंदिर में माथा टेककर आशीर्वाद लिया। उधर, नए बदलावों से खुश दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन का आभार जताया है। उनका कहना है कि ये बदलाव न केवल मेले को सुरक्षित व सुंदर बनाएंगे बल्कि स्थानीय जीवन को भी आसान करेंगे।