जम्मू। हाईकोर्ट ने भर्ती विवाद से जुड़े अहम मामले में कहा कि यदि किसी कर्मचारी को विभागीय गलती के कारण देरी से नौकरी मिली हो तो उसे पुरानी पेंशन योजना, वरिष्ठता और पदोन्नति जैसे लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकारी चूक का खामियाजा कर्मचारी को नहीं भुगतना पड़ेगा।
मामला पावर डेवलपमेंट विभाग में जूनियर इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) भर्ती से जुड़ा है। रघु सिंह ने वर्ष 2007 और 2008 की भर्ती प्रक्रिया में आरबीए श्रेणी के तहत आवेदन किया था। चयन प्रक्रिया पूरी होने पर 59.54 अंक थे जबकि अंतिम चयनित उम्मीदवार को 58.34 अंक मिले थे। प्रमाणपत्र के विवाद के कारण उसे चयन सूची से बाहर कर दिया गया। बाद में अदालत ने उसे पात्र मानते हुए नियुक्ति देने का निर्देश दिया। जुलाई 2014 में जेई के पद पर नियुक्ति मिली। इसके बाद उन्होंने मांग की कि नियुक्ति उसी तारीख से मानी जाए, जिस दिन चयन प्रक्रिया पूरी हुई थी। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने 22 अगस्त 2009 से काल्पनिक नियुक्ति, वरिष्ठता, पदोन्नति और पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने का आदेश दिया था।
कैट के आदेश को सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। न्यायमूर्ति सिंधु शर्मा और न्यायमूर्ति शाहजाद अजीम की खंडपीठ ने कहा कि विभाग या चयन एजेंसी की गलती से किसी योग्य उम्मीदवार को समय पर नियुक्ति नहीं मिलती है तो बाद में उसे उसी चयन प्रक्रिया के अन्य अभ्यर्थियों के बराबर माना जाएगा। वरिष्ठता भी मूल चयन सूची में उसकी मेरिट के आधार पर तय की जाएगी।