पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर गश्त करने में सैनिकों की मदद के लिए दो कूबड़ वाले ऊंटों को जल्द भारतीय सेना में शामिल किया जाएगा। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के शोध में सामने आया है कि दो कूबड़ यानी बैक्ट्रियन ऊंट पूर्वी लद्दाख में 17 हजार फीट की ऊंचाई पर 170 किलोग्राम वजन उठा सकते हैं।
डीआरडीओ के वैज्ञानिक प्रभु प्रसाद सारंगी ने बताया, हम इन ऊंटों पर शोध कर रहे हैं। ये स्थानीय जानवर हैं। हमने इनकी सहनशक्ति और भार वहन क्षमता पर शोध किया है। ये ऊंट लद्दाख की दुर्गम जगहों पर 170 किलोग्राम वजन के साथ 12 घंटे तक गश्त कर सकते हैं।
इन स्थानीय दोहरे कूबड़ वाले ऊंटों की तुलना राजस्थान के एक कूबड़ वाले ऊंटों से की गई थी, जिन्हें उनकी सहनशक्ति परीक्षण के लिए राजस्थान ले जाया गया था। ये ऊंट भोजन और पानी के बिना तीन दिन तक जीवित रह सकते हैं। सारंगी ने आगे कहा, इन ऊंटों का परीक्षण किया जा चुका है और जल्द ही इन्हें सेना में शामिल किया जाएगा।
बढ़ाई जाएगी संख्या...
सारंगी ने कहा, दो कूबड़ वाले ऊंटों की संख्या अभी कम है, लेकिन उचित प्रजनन के बाद इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी और फिर इन्हें सेना में शामिल किया जाएगा। भारतीय सेना पारंपरिक रूप से क्षेत्र के खच्चरों का उपयोग करती है, जो लगभग 40 किलोग्राम भार ले जाने की क्षमता रखते हैं।