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Jammu News: महिलाओं को भाया कृषि व हैंडलूम, स्वरोजगार कर बन रहीं सशक्त

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योजनाओं के माध्यम से प्रशिक्षण लेकर 27 हजार हुईं लाभान्वित, विभागों के माध्यम से 40 हजार ने शुरू किया स्वरोजगार
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सतीश वालिया
जम्मू। प्रदेश में महिलाओं को स्वरोजगार के लिए कृषि और हरकरघा क्षेत्र खूब भा रहा है। दोनों क्षेत्रों में महिलाओं ने दो साल में सबसे ज्यादा रोजगार हासिल किया है। योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया। स्वरोजगार हासिल कर अब महिलाएं परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं।
सरकारी आकड़ों के अनुसार हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट विभाग में 67667 यूनिट खोले गए, जिनमें करीब 12 हजार महिलाओं को रोजगार मिला। इसी तरह कृषि क्षेत्र में कुल 15 हजार महिलाओं को निपुण किया गया। यह ग्राफ स्वरोजगार के क्षेत्र में सबसे ज्यादा है।
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अभी तक विभिन्न विभागों के माध्यम से 40 हजार महिलाएं सशक्त बन चुकी हैं। सिलाई-कढ़ाई का काम सीख कर भी महिलाएं आगे बढ़ रही हैं। घरों की दहलीज के बाहर निकल कर पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। 2023 में कृषि क्षेत्र में सात हजार तो 2024 में आठ हजार महिलाएं, जबकि हथकरघा क्षेत्र में 2023 में पांच हजार तो 2024 में सात हजार महिलाएं लाभान्वित हुई हैं।

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लोन लेकर स्थापित हो रहे यूनिट, मिल रहा रोजगार
प्रशिक्षण लेने के बाद यूनिट स्थापित करने के लिए पैसों की कमी खलती है। ऐसे में महिलाएं स्वरोजगार से दूर होती थीं। लेकिन, विभागों के माध्यम से महिलाओं को यूनिट स्थापित करने के लिए लोन दिया जा रहा है, जिससे वह लाभान्वित हो रही हैं। साथ ही रोजगार प्राप्त कर रही हैं

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किस विभाग के कितना मिला रोजगार

विभाग यूनिट स्वरोजगार महिला
हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट पांच हजार 12 हजार
एससी, एसटी, ओबीसी 2365 तीन हजार
भेड़पालन 827 827
फिशरीज विभाग 69 170
कृषि विभाग 10 हजार 16 हजार
पशुपालन विभाग चार हजार 2389



हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट विभाग निदेशक मोहम्मद नजीर शेख के अनुसार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई गई। प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। सिलाई कढ़ाई सहित अन्य क्षेत्रों में निपुण किया जा रहा है।


कोट
अलग-अलग योजनाओं के तहत महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। योजनाओं के तहत लोन मुहैया करवा रहा है। महिलाएं पैसा कमाकर आर्थिकी सुदृढ़ कर रही हैं।
-एएस रीन, निदेशक, कृषि विभाग

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हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार कर रही हूं। 2018 से मिशन के माध्यम से काम मिला। अब मेलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों में स्टाल लगाकर सामान बेच कर कमाई कर रही हूं। इस कमाई से परिवार चला रही हूं।
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-प्रीति देवी, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन


पहले रोजगार की तलाश रही। 2019 में मिशन से जुड़कर प्रशिक्षण लिया। हाथ से बने उत्पाद तैयार कर हर माह 20 से 30 हजार रुपये कमाई कर रही हूं। सरकार की ओर से भी सहयेाग मिला।

- सुमन देवी, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन
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