प्रो. ताजुद्दीन
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शहीद-ए-आजम भगत सिंह को आतंकी कहने के आरोप में जम्मू विश्वविद्यालय के राजनीतिक विभाग के प्रोफेसर मोहम्मद ताजुद्दीन फंस गए हैं। मामले ने तूल पकड़ लिया है। शुक्रवार को विद्यार्थियों ने रैली निकाल प्रदर्शन कर प्रोफेसर को पद से हटाने की मांग की। प्रदर्शनकारी छात्रों ने विवि के मुख्य द्वार को एक घंटा बंद रखा। राजनीतिक विभाग में प्रोफेसर की नेमप्लेट तोड़ी। दरवाजे पर स्याही फेंकी। इस बीच प्रोफेसर के समर्थक विद्यार्थियों ने अलग से रैली निकाल कर प्रोफेसर पर यह मामला वापस लेने की मांग की। उन्होंने दरवाजे पर स्याही साफ कर दी। हालांकि दोनों पक्षों में कोई टकराव नहीं हुआ।
शुक्रवार को विश्वविद्यालय खुलते ही विद्यार्थियों ने प्रोफेसर के खिलाफ हंगामा शुरू कर दिया। वाइस चांसलर मनोज धर के कार्यालय का घेराव करने के बाद विद्यार्थी राजनीतिक विज्ञान विभाग में घुस गए और नारेबाजी करने लगे। उन्होंने कहा कि भगत सिंह युवाओं के रोल माडल हैं। उन्हें आतंकी बताना शहादत का अपमान है। प्रोफेसर को हटाए जाने तक आंदोलन जारी रहेगा।
जेयू ने जांच कमेटी बिठाई
जेयू प्रशासन ने इस मामले में जांच बिठाई है। डीन एकेडमिक अफेयर्स की अध्यक्षता में जांच कमेटी सात दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। जांच पूरी होने तक ताजुद्दीन को पढ़ाने से मना किया गया है। जेयू के इंचार्ज मीडिया डॉ. विनय ठुस्सू के अनुसार कुछ विद्यार्थियों की शिकायत पर वीसी ने जांच कमेटी बिठाई है।
आरोप निराधार, तथ्य समझने की जरूरत
प्रो. ताजुद्दीन ने कहा कि हम आरोप निराधार है। लेक्चर के संदर्भ को समझने की जरूरत है। लेक्चर के एक अंश से चीजों को नहीं समझा जाता है। कक्षा में लेनिन पर लेक्चर दे रहे थे। उस संदर्भ में उनकी जीवनी, उस समय की परिस्थिति उसके भाई का जिक्र आया। जिन्हें आतंकी प्रचार का अगुवा बताते हुए फांसी दी गई थी। कोई भी सरकार अपने खिलाफ विद्रोह करने वालों को आतंकी कहता है। उदाहरण के तौर पर समझाया गया कि हमारे लिए भगत सिंह क्रांतिकारी थे, लेकिन ब्रिटिस शासक के लिए आतंकी थे।