जम्मू। अब जम्मू यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन की पढ़ाई सिर्फ किताबों और अंतिम परीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी। नई शिक्षा नीति के तहत विवि इस सत्र से चार वर्षीय ग्रेजुएशन व्यवस्था लागू करने जा रहा है। बीए, बीएससी और बीकॉम समेत सभी अंडरग्रेजुएट कोर्सों में पढ़ाई, परीक्षा और मूल्यांकन का तरीका बदल जाएगा। छात्रों को पसंद के विषय चुनने, रोजगार से जुड़े कोर्स, इंटर्नशिप और रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम करने का मौका मिलेगा।
इससे पहले छात्र केवल अंतिम परीक्षा के आधार पर पास होते थे। नई व्यवस्था में पूरे साल की पढ़ाई और गतिविधियां भी रिजल्ट तय करेंगी। कम उपस्थिति या प्रेजेंटेशन में कमजोर प्रदर्शन का असर रिजल्ट पर पड़ेगा। क्लास टेस्ट, प्रोजेक्ट, सेमिनार और आंतरिक मूल्यांकन के अंक मिलेगे। छात्रों को कम्युनिकेशन स्किल, डिजिटल टूल, उद्यमिता और रोजगार से जुड़े कोर्स पढ़ाए जाएंगे। चौथा साल सबसे अलग होगा। इस दौरान छात्र रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम करेंगे और उन्हें ऑनर्स विद रिसर्च डिग्री का विकल्प मिलेगा। बदलाव से नेट, पीएचडी और उच्च शिक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों को काफी मदद मिलने के आसार हैं।
पसंद के हिसाब से कॉम्बिनेशन तैयार कर सकेंगे छात्र
सबसे बड़ा बदलाव मेजर और माइनर विषयों का होगा। छात्र सिर्फ एक विषय के बजाय रुचि के हिसाब से पढ़ाई का कॉम्बिनेशन तैयार कर सकेंगे। बीएससी का छात्र अर्थशास्त्र, भाषा या कंप्यूटर से जुड़े विषय पढ़ सकेगा जबकि कला वर्ग के छात्र डिजिटल और तकनीकी कोर्स चुन सकेंगे। नई व्यवस्था में इंटर्नशिप और फील्ड वर्क को जरूरी बनाया गया है। छात्रों को कॉलेज से बाहर संस्थानों और अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर काम सीखना होगा। इससे काम का अनुभव भी मिलेगा। एनसीसी, एनएसएस, योग और पर्यावरण अध्ययन जैसी गतिविधियां भी पढ़ाई का हिस्सा होंगी ताकि छात्रों के व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान दिया जा सके।
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बीच में पढ़ाई छूटी तो भी नुकसान नहीं
छात्रों को बीच में पढ़ाई छोड़ने पर भी खाली हाथ नहीं लौटना पड़ेगा। पहले साल के बाद सर्टिफिकेट, दूसरे साल के बाद डिप्लोमा, तीन साल बाद डिग्री और चार साल पूरा करने पर ऑनर्स या रिसर्च डिग्री दी जाएगी। अगर छात्र किसी कारण से पढ़ाई छोड़ देता है तो बाद में उसी स्तर से पढ़ाई शुरू कर सकेगा। शैक्षणिक क्रेडिट बैंक प्रणाली भी लागू होगी। इसके तहत पढ़ाई से जुड़े रिकॉर्ड ऑनलाइन सुरक्षित रहेंगे। अकादमिक मामलों के डीन प्रो. जेपी जूरेल का कहना है कि नई व्यवस्था के साथ ग्रेजुएशन सिर्फ डिग्री लेने तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि छात्रों को नौकरी, रिसर्च और नई स्किल्स के लिए तैयार करने पर जोर होगा।