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Jammu News: ट्रेनें रद्द होने से प्रयागराज का सफर थकान भरा, सरकारी स्लीपर बसों की बढ़ी मांग

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निजी बसों में कट रही जेब, सरकारी सीटर से करीब दोगुना किराया वसूल रहे संचालक
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स्लीपर का प्रति सवारी लिया जा रहा सात से साढ़े सात हजार रुपये किराया
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास के चलते ट्रेनें रद्द हैं। ऐसे में महाकुंभ जाने वाले श्रद्धालु अब बस से यात्रा करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। जम्मू से प्रतिदिन 12 से 15 निजी व सरकारी बसें प्रयागराज जा रही हैं। इनमें हजारों लोग सफर कर रहे हैं। हालांकि, सरकारी स्लीपर बसें नहीं होने के करण लोगों को मजबूरन निजी स्लीपर बसों में ज्यादा किराया देकर सफर करना पड़ रहा है।
जम्मू से प्रयागराज जाने के लिए लोगों में उत्साह है। कटड़ा, उधमपुर, जम्मू, सांबा और कठुआ से विशेष बसें चल रही हैं। अधिकांश बसे स्लीपर हैं। यही कारण है जम्मू-कश्मीर परिवहन निगम की बसों के प्रति रुझान कम है, क्योंकि परिवहन निगम के पास स्लीपर बसें नहीं हैं।
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निगम प्रतिदिन बस चला रहा है, जिसमें औसतन 80 लोग ही सफर कर रहे हैं। इसके मुकाबले निजी बसों में यात्रियों की संख्या ज्यादा है। क्योंकि, स्लीपर बसों का परिचालन हो रहा हैं। लक्जरी स्लीपर बसों में यात्री सफर को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि इसमें किराया सरकारी के मुकाबले काफी ज्यादा है।

जेकेआरटीसी का किराया तो सही, लेकिन बेड़े में स्लीपर बस नहीं
जम्मू से निजी स्लीपर बस में आने-जाने का किराया सात हजार से 75 सौ रुपये तक है, जबकि सीट का किराया पांच से छह हजार रुपये प्रति व्यक्ति है। सरकारी सीटर बसों में एक व्यक्ति का आने-जाने का किराया सिर्फ 3380 रुपये है। सरकारी बस के प्रति कम रुझान का कारण स्लीपर बस नहीं होना है।
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सीटर बसों में लंबा सफर थकानभरा : सुमित
निजी स्लीपर बस से महाकुंभ की यात्रा कर लौटे डोडा के सुमित सिंह ने बताया कि सरकारी बस में सफर करना बहुत कठिन है। सीटर बसों में इतना लंबा सफर तय करना थकान भरा रहता है। इसके लिए निजी स्लीपर में जाना पड़ता है, जबकि उसका किराया काफी ज्यादा है।
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