एसोसिएशन के मामलों को चलाने के लिए बीसीआई ने 2021 में गठित की थी चार सदस्य उप समिति
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) 2015 से बिना निर्वाचित बॉडी के काम कर रही है। 10 साल बाद भी चुनाव नहीं हो पाए हैं। ऐसा तब है, जब 2021 जेकेसीए के मामलों को चलाने वाली तीन सदस्य उप समिति द्वारा लोढ़ा समिति की सिफारिशों के अनुरूप संशोधित संविधान को सर्वोच्च न्यायालय ने मंजूरी दी है।
जेकेसीए में चुनाव करवाने के लिए कई पूर्व रणजी खिलाड़ी लगातार आवाज उठा रहे है। अंतिम बार चुनाव 2015 में हुए थे, लेकिन इससे पहले लागू हुई लोढ़ा समिति की सिफारिशों के कारण चुनाव 2017 में रद्द कर दिए गए। इसके बाद जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने पूर्व डीआईजी आशिक बुखारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया था। 2021 तक काम करने के बाद जून 2021 में जम्मू-कश्मीर लद्दाख उच्च न्यायालय ने जेकेसीए प्रबंधन को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को सौंपा दिया और लोढ़ा समिति की सिफारिशों के अनुरूप संशोधित संविधान तैयार करने की जिम्मेदारी दी।
इसके लिए बीसीसीआई ने तीन सदस्य उप-समिति बनाई थी। उप-समिति ने तीन साल बाद संशोधित संविधान को तैयार किया है। इसके बाद अब चुनाव को लेकर मांग उठ रही है, लेकिन फिलहाल कोई पहल नहीं हो रही है।
उप समिति के वर्तमान कार्यकाल में जम्मू-कश्मीर में क्रिकेट गतिविधियां बढ़ी हैं। प्रदेश के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा दिखाई है। सुविधाओं में भी वृद्धि हुई, लेकिन निर्वाचित बॉडी न होने से खिलाड़ियों को उप-समिति के हर फैसले पर मंजूरी देनी पड़ती है। नाम नहीं लिखने की शर्त पर जेकेसीए के एक रणजी खिलाड़ी ने कहा कि सुविधाएं बढ़ी हैं। टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही है, लेकिन उप समिति अपने नियम खिलाड़ियों पर थोपे जाते है। किसी तरह की सुनवाई नहीं होती है।
नामित और निर्वाचित बॉडी में है अंतर
पूर्व रणजी खिलाड़ी पी. केसर ने कहा कि उप समिति ने अच्छा काम किया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है चुनी हुई बॉडी का गठन न हो। नामित बॉडी और निर्वाचित बॉडी में अंतर होता है। उप समिति पर निगरानी नहीं और न ही वह जवाबदेह है। जेकेसीए का संशोधित संविधान बनाया गया है। बीसीसीआई को चाहिए कि चुनाव करवाए जाएं।
मौजूदा उप समिति या तो इस व्यवस्था को चलाए रखना चाहती है या फिर उनमें से कोई सदस्य जेकेसीए के चेयरमैन बनना चाहते हैं। इस कारण चुनाव में देरी हो रही है। क्योंकि, चुनाव को लेकर अब कोई विवाद नहीं है। उप समिति जिन अच्छे परिणामों का हवाला दे रही है वह मेहनत खुद खिलाड़ियों और पूर्व प्रबंधकों की है। आईपीएल शुरू होने से बीबीसीआई की अच्छी कमाई हुई। उसमें से राज्य एसोसिएशन को भी पैसा मिला, जिससे स्थिति में बदलाव हुआ। निर्वाचित बॉडी न होने का असर खिलाड़ियों पर पड़ता है।
- महबूब इकबाल, पूर्व चेयरमैन, जेकेसीए