जम्मू रोपवे प्रोजेक्ट पर काम के दौरान एक महीने पहले हुए हादसे की जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई है। इसके चलते यह प्रोजेक्ट अब तक अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सका है। दूसरे चरण के महामाया-बाहु फोर्ट रोपवे प्रोजेक्ट में 20 जनवरी को रेस्क्यू ट्रॉली टूट गई थी। इसमें दो मैकेनिकों की मौत और चार घायल हो गए थे।
घटना का जांच अधिकारी (एडीसी) भी हाल ही में बदला गया है। हालांकि, पहले चरण में पीरखो-महामाया में लगभग काम पूरा कर लिया गया है। मगर दूसरे चरण के प्रोजेक्ट में हादसे की जांच पूरी न होने से फाइनल ट्रायल सहित अन्य कार्य अभी तक लटके हैं। प्रोजेक्ट 75 करोड़ रुपये का है।
1.66 किलोमीटर के रोपवे प्रोजेक्ट के दूसरे चरण के दो टावर और सात केबिन वाले बाहु फोर्ट-महामाया का अप्रैल 2018 में सफल ट्रायल किया गया था। दिसंबर 2018 में पहले चरण के महामाया-पीरखो रोपवे का सफल ट्रायल (प्री कमिशनिंग ट्रायल) किया गया था। इसमें सात टावर और चौदह केबिन स्थापित होंगे।
सूत्रों के अनुसार पुलिस ने घटना के दौरान कई फुटेज जुटाए हैं। प्रोजेक्ट साइट पर कई सीसीटीवी की निगरानी में काम होता है। इसमें प्राथमिक चरण में लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसमें रेस्क्यू ट्राली में क्षमता से अधिक लोग बैठे थे। सूत्रों के अनुसार ट्रॉली पर बैठे लोगों ने नियमों के तहत सेफ्टी बेल्ट भी नहीं पहने थे, जिससे वे घटना के समय हवा में तार से लटकने के बजाय सीधे जमीन पर गिर गए।
घटना के बाद पीरखो-महामाया रोपवे प्रोजेक्ट पर कई सिविल वर्क पूरे किए गए हैं। लेकिन कुछ फाइनल टच देने वाले कार्य नहीं हो पाए हैं। इसमें राज्य सरकार की ओर से जांच टीम का रोपवे का निरीक्षण करना बाकी है। तुर्की के विशेषज्ञों द्वारा भी वायर को रन करवाया जाना है।
दोनों रोपवे को पहले नए साल पर जनता को समर्पित करने की योजना थी, लेकिन अभी तक इसे शुरू नहीं किया जा सका है। सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट आने के बाद भी सारी औपचारिकताएं पूरी करने में छह हफ्ते लग सकते हैं। रोपवे का जेएंडके केबल कार कारपोरेशन के तहत कोलकाता आधारित एक कंपनी द्वारा निर्माण किया जा रहा है।
दोनों रोपवे में जर्मनी, तुर्की, अस्ट्रिया, स्विजरलैंड की अत्याधुनिक सामग्री लगाई गई है। एक केबिन में एक समय छह लोग बैठ सकते हैं। रियासत में तीस साल बाद जम्मू में केबल कार को स्थापित किया गया है।