जम्मू-कश्मीर में चार सीटों पर दिग्गजों की जिद कांग्रेस को भारी पड़ गई। लोकसभा में आरएसपुरा-जम्मू दक्षिण सीट पर बढ़त के बावजूद गलत टिकट आवंटन से हार का सामना करना पड़ा। बाहु, छंब और अखनूर सीट पर भी समीकरण बदल सकते थे।
जम्मू जिले की बाहु, आरएस पुरा-जम्मू दक्षिण, छंब और अखनूर विधानसभा सीट पर कांग्रेस दिग्गजों की जिद पार्टी को भारी पड़ गई। इन सीटों पर टिकटों के सही आवंटन न होने के कारण पार्टी को चारों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।
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2014 के लोकसभा के नतीजों में कांग्रेस इनमें एक सीट पर बढ़त और एक पर भाजपा को कांटे की टक्कर दे रही थी। लेकिन नामांकन से पूर्व संध्या पर सीटों की घोषणा चारों प्रत्याशियों को हार दे गई। इनमें कम से कम दो सीटों पर पार्टी की जीत को संभावित माना जा रहा था।
2024 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो कांग्रेस ने आरएस पुरा-जम्मू दक्षिण से 44162 वोट लेकर बढ़त पाई थी, जबकि भाजपा को 37798 ही वोट मिले थे। बताया जाता है कि कांग्रेस नेता तरणजीत सिंह टोनी पिछले तीन साल से इस सीट पर काम कर रहे थे। वह डीडीसी सदस्य भी हैं।
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इस सीट पर सिख चेहरा अहम माना जा रहा है, जिसके तोड़ में भाजपा ने डा. नरेंद्र सिंह को उतारा। हालांकि नरेंद्र सिंह राष्ट्रीय सचिव रहने के कारण अधिकांश समय भाजपा में राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रहे, जिससे उनका आरएस पुरा-जम्मू दक्षिण में जनाधार कम माना जा रहा था। लेकिन नामांकन से ठीक पहले कांग्रेस ने अपने पिछले लोकसभा के प्रत्याशी व कार्यकारी अध्यक्ष रमण भल्ला को उतारकर समीकरण बदल दिए।
रमण भल्ला ने विधानसभा चुनाव में नरेंद्र सिंह को टक्कर दी और 1966 वोटों से ही हारे, लेकिन कहीं न कहीं पार्टी को सिख चेहरा न देने का नुकसान उठाना पड़ा। चूंकि तरणजीत सिंह लंबे समय से इस सीट पर सक्रिय थे और लोकसभा चुनाव में भी पार्टी को बढ़त दिलाने में कामयाब हुए थे।
ऐसे में अगर उन्हें यहां से टिकट दे दिया जाता तो समीकरण बदल सकते थे। टोनी को भी ऐन मौके पर बाहु सीट से उतार दिया गया, जबकि उनके लिए यह बिल्कुल नई सीट थी। यहां रमण भल्ला का दबदबा अधिक माना जा रहा था।
यह भी चर्चा
पार्टी में भी ऐसी चर्चा है कि अगर रमण भल्ला को बाहु और टोनी को आरएस-पुरा-जम्मू दक्षिण सीट से उतारा जाता तो पार्टी के खाते में दो सीटे संभावित थी।
2024 के लोकसभा चुनाव में बाहु विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने भाजपा के 37202 वोटों के मुकाबले 36156 वोट हासिल करके कड़ी टक्कर दी थी। रमण भल्ला ने 2008 में गांधीनगर विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की थी।
छंब में सतीश शर्मा का दबदबा अधिक था
उधर, छंब सीट पर भी पार्टी टिकट देने में यह गलती कर गई। इस सीट से पूर्व सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता स्व. मदन लाल शर्मा के बेटे सतीश शर्मा का दबदबा अधिक लग रहा था।
2014 के विधानसभा चुनाव में छंब सीट एससी के लिए आरक्षित थी। इससे पहले 2008 के चुनाव में कांग्रेस के पूर्व उपमुख्यमंत्री तारा चंद ने इस सीट से जीत दर्ज की थी। लेकिन 16 साल बाद भी वह इसी सीट से लड़ने के लिए अड़े रहे, जबकि 2024 में यह सीट सामान्य वर्ग में चली गई थी।
तारा चंद को अधिक एसी वोट का समर्थन था। जिससे छंब सीट से भी पार्टी को हार देखनी पड़ी और पार्टी से ही बागी निर्दलीय उम्मीदवार सतीश शर्मा बाजी मार गए। इस सीट पर तारा चंद तीसरे नंबर पर रहे।
एक-दूसरे पर फोड़ रहे हार का ठीकरा
पार्टी में यह भी चर्चा है कि अगर तारा चंद को इस बार आरक्षित हुई अखनूर सीट से उतार दिया जाता तो समीकरण बद सकते थे, क्योंकि वहां भाजपा प्रत्याशी मोहन लाल के मुकाबले कांग्रेस को एससी का तारा चंद चेहरा मिल जाता। लेकिन पार्टी ने ऐसा न करके यह सीट भी गंवा दी।
यहां कांग्रेस के प्रत्याशी अशोक कुमार दूसरे स्थान पर रहे। इन चार सीटों पर हार के बाद पार्टी के भीतर चिंतन के साथ एक दूसरे पर ठिकरा फोड़ा जा रहा है। कुल मिलाकर पार्टी के दिग्गज अगर संभावित सीटों पर लड़ते तो कांग्रेस के विधायकों का आंकड़ा बनने की संभावना थी।
पिछले नौ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस चुनाव में सबसे न्यूनतम प्रदर्शन करके सिर्फ छह ही सीटें हासिल की हैं, जिसमें से जम्मू संभाग से सिर्फ एक ही सीट मिली है। इन सारे परिदृश्य के बाद पार्टी संगठन में बड़े स्तर पर फेरबदल की तैयारी की जा रही है, ताकि आगामी चुनाव के लिए प्लेटफार्म तैयार किया जा सके।