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वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप: 61 किलो भार वर्ग में पहले स्थान पर रहे रंजेश, पैराओलंपिक में गोल्ड लाने का है सपना

Tue, 21 Feb 2023 04:28 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

पहले दिन 49 किलो, 55 किलो, 61 किलो, 67 किलो और 73 किलो भार वर्ग में यूथ, जूनियर और सीनियर वर्ग के खिलाड़ियों के मुकाबले हुए। रंजेश सिंह पैरा-एथलीट ने 61 किलो भार वर्ग में हिस्सा लिया और प्रथम स्थान हासिल किया। 
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रंजेश सिंह - फोटो : संवाद
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर यूटी स्तरीय दो दिवसीय वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप का आगाज सोमवार को भगवती नगर इनडोर स्टेडियम जम्मू में हुआ। पहले दिन 49 किलो, 55 किलो, 61 किलो, 67 किलो और 73 किलो भार वर्ग में यूथ, जूनियर और सीनियर वर्ग के खिलाड़ियों के मुकाबले हुए। रंजेश सिंह पैरा-एथलीट ने 61 किलो भार वर्ग में हिस्सा लिया और प्रथम स्थान हासिल किया। 

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73 किलो भार के यूथ वर्ग में आयुष कुमार दुबे ने 90 किलो भार उठाकर पहला स्थान हासिल किया। जूनियर वर्ग में निर्भय प्रताप सिंह ने 261 किलो भार उठाकर पहला, नरिंदर ललोत्रा ने 170 किलो भार उठाकर दूसरा और साहिल अब्बास ने 167 किलो भार उठाकर तीसरा स्थान हासिल किया। वहीं, सीनियर वर्ग में निर्भय प्रताप सिंह ने 261 किलो भार उठाकर पहला और राहुल चोपड़ा ने 205 किलो भार उठाकर दूसरा स्थान प्राप्त किया।

67 किलो भार में यूथ वर्ग में हरीश सैनी ने 133 किलो भार उठाकर पहले स्थान पर रहे। वहीं, कृष रकवाल 92 किलो भार उठाकर दूसरे और पृहचित आर्या 85 किलो भार उठाकर तीसरे स्थान पर रहे। जूनियर वर्ग में अविनाश कुल 114 किलो भार उठाकर पहले स्थान पर रहे। वहीं, सीनियर वर्ग में केवल सिंह ने 192 किलो भार उठाकर पहला, मानव शर्मा ने 126 किलो भार उठाकर दूसरा और भूपिंदर सिंह ने 124 किलो भार उठाकर तीसरा स्थान प्राप्त किया।
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49 किलो भार वर्ग में यूथ में रमेश सिंह ने पहला और आदित्य थापा ने दूसरा स्थान हासिल किया। 55 किलो भार वर्ग में यूथ में आशीष सिंह ने पहला स्थान हासिल किया। वही, जूनियर वर्ग में जसमीत मगोत्रा ने पहला, वासु शर्मा ने दूसरा और हिमांशु ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। सीनियर वर्ग में अनिल कुमार प्रथम रहे। 61 किलो भार में यूथ वर्ग के राहुल सिंह पहले और कृष सैनी दूसरे स्थान पर रहे। जूनियर वर्ग में अरविंद कुमार पहले और मनीर मोहम्मद दूसरे स्थान पर रहे। सीनियर वर्ग में प्रशांत शर्मा पहले, सौरभ शर्मा दूसरे और संत कुमार ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।

प्रतियोगिता का उद्घाटन जम्मू-कश्मीर वेटलिफ्टिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष हरभजन सिंह ने किया। इस प्रतियोगिता में विभिन्न जिलों के 115 खिलाड़ियों ने भाग लिया। इस दौरान मुख्य अतिथि जम्मू के मंडल खेल अधिकारी अशोक सिंह ने मेधावी खिलाड़ियों के बीच पुरस्कार वितरित किए। उन्होंने कहा कि खेल युवाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और कौशल, अनुभव और आत्मविश्वास प्राप्त करने में मदद करता है।

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वेटलिफ्टिंग को करिअर बनाया, जिला और प्रदेश स्तर पर स्वर्ण और रजत जीत चुके

मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपने में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है...इस कथन को चरितार्थ कर रहे हैं वेटलिफ्टर रंजेश सिंह। रंजेश उधमपुर जिले के बसंतगढ़ तहसील से ताल्लुक रखते हैं। रंजेश बताते हैं कि 2012 में करंट लगने से उनका दाहिना हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। नौबत ये आ गई कि इलाज के दौरान हाथ काटना पड़ा। रंजेश ने कभी भी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।

इस घटना के बाद उन्होंने कुछ करने की ठानी। उनका कहना है कि इंसान दिमाग से दिव्यांग होता है, शरीर से नहीं। इससे पहले उन्होंने कोई खेल नहीं खेला था। अपने गांव के एक छोटे से जिम में उन्होंने लोगो को वेटलिफ्टिंग करते देखा। इसके बाद उन्होंने तय किया कि वह वेटलिफ्टिंग करेंगे। वेटलिफ्टिंग के बारे में उनको ज्यादा जानकारी नहीं थी। वह वेटलिफ्टिंग कोच इंद्रपाल से साल 2022 में एमए स्टेडियम में मिले और उनसे कहा कि वह वेटलिफ्टिंग करना चाहते हैं।

कोच ने उनका पूरा सहयोग किया और रंजेश का प्रशिक्षण शुरू हुआ। प्रतिदिन शाम को वह अपनी किट के साथ स्टेडियम जाते और घंटों अभ्यास करते। वह बताते हैं कि जब उन्होंने यह बात घर वालों को बताई कि वह वेटलिफ्टिंग करना चाहते हैं तो घर वालों ने पूरा समर्थन दिया। उनका संयुक्त परिवार है और परिवार के सभी लोग उनको बहुत सहयोग करते हैं। रंजेश अपने कोच रवि सिंह का बहुत धन्यवाद करते हैं। उनका कहना है कि उनके कोच रवि सिंह उनको बहुत सहयोग करते हैं। वर्तमान में वह रवि सिंह की कोचिंग में वेटलिफ्टिंग करते हैं। रंजेश ने जिला स्तरीय और राज्य स्तरीय वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिताओं के 61 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण और रजत पदक जीता था। रंजेश का सपना भारत के लिए पैराओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना हैं। रंजेश उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं जो जिंदगी से हार मान लेते हैं।

 
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