वेटलिफ्टिंग को करिअर बनाया, जिला और प्रदेश स्तर पर स्वर्ण और रजत जीत चुके
मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपने में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है...इस कथन को चरितार्थ कर रहे हैं वेटलिफ्टर रंजेश सिंह। रंजेश उधमपुर जिले के बसंतगढ़ तहसील से ताल्लुक रखते हैं। रंजेश बताते हैं कि 2012 में करंट लगने से उनका दाहिना हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। नौबत ये आ गई कि इलाज के दौरान हाथ काटना पड़ा। रंजेश ने कभी भी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
इस घटना के बाद उन्होंने कुछ करने की ठानी। उनका कहना है कि इंसान दिमाग से दिव्यांग होता है, शरीर से नहीं। इससे पहले उन्होंने कोई खेल नहीं खेला था। अपने गांव के एक छोटे से जिम में उन्होंने लोगो को वेटलिफ्टिंग करते देखा। इसके बाद उन्होंने तय किया कि वह वेटलिफ्टिंग करेंगे। वेटलिफ्टिंग के बारे में उनको ज्यादा जानकारी नहीं थी। वह वेटलिफ्टिंग कोच इंद्रपाल से साल 2022 में एमए स्टेडियम में मिले और उनसे कहा कि वह वेटलिफ्टिंग करना चाहते हैं।
कोच ने उनका पूरा सहयोग किया और रंजेश का प्रशिक्षण शुरू हुआ। प्रतिदिन शाम को वह अपनी किट के साथ स्टेडियम जाते और घंटों अभ्यास करते। वह बताते हैं कि जब उन्होंने यह बात घर वालों को बताई कि वह वेटलिफ्टिंग करना चाहते हैं तो घर वालों ने पूरा समर्थन दिया। उनका संयुक्त परिवार है और परिवार के सभी लोग उनको बहुत सहयोग करते हैं। रंजेश अपने कोच रवि सिंह का बहुत धन्यवाद करते हैं। उनका कहना है कि उनके कोच रवि सिंह उनको बहुत सहयोग करते हैं। वर्तमान में वह रवि सिंह की कोचिंग में वेटलिफ्टिंग करते हैं। रंजेश ने जिला स्तरीय और राज्य स्तरीय वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिताओं के 61 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण और रजत पदक जीता था। रंजेश का सपना भारत के लिए पैराओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना हैं। रंजेश उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं जो जिंदगी से हार मान लेते हैं।