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Jammu News: सुरेंद्र कुमार की अंतिम इच्छा हुई पूरी, दो लोगों को दे गए नई रोशनी

Mon, 02 Sep 2024 01:12 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

78 वर्षीय सुरेंद्र कुमार की अंतिम इच्छा पूरी करते हुए उनके दान किए गए नेत्र से दो जरूरतमंदों को नई दृष्टि प्राप्त हुई। उनके परिवार ने भी नेत्रदान के लिए पंजीकरण कराया।
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नेत्र दाता सुरेंद्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दुनिया से चले जाने के बाद भी तालाब तिल्लो निवासी 78 वर्षीय सुरेंद्र कुमार दो लोगों को नया रोशन जीवन दे गए। उनके दान किए गए दो नेत्र (कार्निया) दो जरूरतमंदों को प्रत्यारोपित (ट्रांसप्लांट) किए गए।

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परिवारवालों को अपने के जाने का दुख है, लेकिन यह सुखद अहसास भी है कि उनके प्रिय के नेत्र से दो लोग अब इस रोशन दुनिया को देख सकेंगे। दिवंगत के बेटे गौतम जैन ने बताया कि सुरेंद्र अस्वस्थ चल रहे थे। उनकी अंतिम इच्छा थी कि उनके चले जाने पर उनके दोनों नेत्र दान किए जाएं। गत शुक्रवार की रात करीब नौ बजे उनका देहांत हो गया।

वह उन्हें लेकर अस्पताल गए थे, लेकिन डाॅक्टरों ने उन्हें मृत लाया घोषित कर दिया। जिसके बाद उन्हें घर लाकर अपने जैन समुदाय को संपर्क किया गया। जिसके बाद जीएमसी में दो मरीजों को उनके कार्निया प्रत्यारोपित किए गए। समुदाय की ओर से सार्वजनिक नेत्रदान की अपील की जाती है। उन्होंने बताया कि परिवार के अन्य 12 सदस्यों ने भी मौत पर नेत्रदान के लिए खुद को पंजीकृत किया हुआ है।
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सोटो (स्टेट आर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन) के समन्वयक इरफान अहमद लोन ने बताया कि उन्हें शुक्रवार रात 10.30 बजे दिवंगत के नेत्रदान के लिए सूचित किया गया जिसके बाद जीएमसी से विशेष टीम को उनके घर भेजा गया और घर पर ही नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की गई। यहां शनिवार को एक 55 वर्षीय यशपाल गुप्ता और एक 83 वर्षीय भूपेंद्र नाग को कार्निया प्रत्यारोपित किया गया। नेत्र विभाग जीएमसी के एचओडी डाॅ. अशोक शर्मा के अनुसार दोनों रोगियों की नेत्र प्रत्यारोपण की जटिल प्रक्रिया की गई।

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इसमें यशपाल को कुछ महीने पहले जीएमसी जम्मू में सेकेंडरी स्क्लेरल फिक्सेटेड इंट्राओकुलर लेंस (एसएफआईओएल) प्रत्यारोपण किया गया था। हाल ही में की गई प्रक्रिया का उद्देश्य कॉर्नियल क्षति को ठीक करना और दृष्टि दोष से दीर्घकालिक राहत प्रदान करना था, जिससे उसके जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार हुआ।

इसी तरह भूपेंद्र नाग पूर्ववर्ती स्टेफिलोमा के मामले में, पूर्ववर्ती स्टेफिलेक्टोमी के साथ दाहिनी आंख में एक जटिल पेनेट्रेटिंग केराटोप्लास्टी से गुजरना पड़ा। इस नाजुक प्रक्रिया में स्टेफिलोमा को हटाना शामिल था, जिससे कॉर्निया में गंभीर विकृति आ गई थी और इसे एक स्वस्थ दाता कॉर्निया से बदलना था। आगे की जटिलताओं को रोकने और रोगी की दृष्टि को बहाल करने में यह सर्जरी महत्वपूर्ण थी।

प्रत्यारोपण सर्जरी टीम में डॉ. नलिनी बीरपुरी, डॉ. सिमरनजीत सिंह, डॉ. सुशांत खरका, रिफात (एसएसएन) और प्रीतम चंद (एमटीएस), आई बैंक के प्रोफेसर व प्रबंध निदेशक डॉ. हंसराज शर्मा, डॉ. विजयता गुप्ता, डॉ. तपन शर्मा, डॉ. निहारिका वर्मा और डॉ. स्वाति महाजन शामिल रहे। बताया जाता है कि जीएमसी में इस 25वां कार्निया दान से 50 जरूरतमंद मरीजों को कार्निया प्रत्यारोपित किया जा चुका है।
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