नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के बीच मजबूती नहीं मजबूरी का गठबंधन है। सीट बंटवारे को फारूक, उमर और कांग्रेस अपनी-अपनी मजबूरी बता चुकी है। कांग्रेस ने कहा कि हम सभी 90 सीटों पर लड़ने में सक्षम हैं। नेकां ने कहा कि गठबंधन के कारण टिकट न मिलने से कई कार्यकर्ता निराश हैं।
जम्मू-कश्मीर में अभी पहले चरण के चुनाव को 16 दिन शेष हैं। इससे पहले ही नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के गठबंधन पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। ये सवाल किसी और ने नहीं खुद दोनों पार्टियों ने ही उठाए हैं। गठबंधन के दूसरे दिन 27 अगस्त को नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि गठबंधन रियासत बचाने की मजबूरी में किया गया है।
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फारूक के बयान के चार दिन बाद जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जेकेपीसीसी) मुख्यालय में कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने कहा कि नेकां के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन राष्ट्रीय मजबूरी में किया गया है। गठबंधन को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष भी ज्यादा खुश नजर नहीं आए।
उमर ने कहा कि गठबंधन में कई चीजें सहन करनी पड़ती हैं। गठबंधन के चलते हमारे कुछ कार्यकर्ताओं को मौका नहीं मिल पाया है। पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता 10 साल से विधानसभा चुनाव का इंतजार कर रहे थे लेकिन सीट शेयरिंग के चलते कइयों को टिकट नहीं मिल पाए। गठबंधन की मजबूरी का एक बड़ा कारण पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की बिजबिहाड़ा सीट से प्रत्याशी और महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा के बयान से भी झलकता है।
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इल्तिजा का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव में कोई भी पार्टी स्पष्ट रूप से बहुमत हासिल नहीं कर पाएगी। कांग्रेस और नेकां ने बहुमत और सत्ता प्राप्ति के लिए गठबंधन किया है जबकि दोनों की विचारधार मेल नहीं खाती। पीडीपी अंत में किंगमेकर की भूमिका निभाएगी।
गठबंधन की मजबूरी के केंद्र में भाजपा
पीपुल्स कॉन्फ्रेंस लोकसभा चुनाव के वक्त से नेशनल कॉन्फ्रेंस पर हमलावर रही है। पीडीपी इस बात को लेकर हवा बना रही थी कि नेकां और भाजपा अंदर खाते एक-दूसरे से मिले हुए हैं। प्रदेश में ये दोनों पार्टियां लोगों को दिखाने के लिए विरोध करती हैं और दिल्ली में एक हो जाती हैं।
भाजपा के साथ नाम जुड़ता देख नेकां ने विधानसभा चुनाव से एन वक्त पहले गठबंधन का फैसला लिया। नेकां खुद खुले मंच से कह चुकी है कि भाजपा को रोकना उनका उद्देश्य है। इसके साथ ही वह किसी भी हाल में यह हवा नहीं बनने देना चाहती है कि हम दोनों में किसी तरह से संबंध हैं।
जम्मू संभाग की कुछ सीटों पर कांग्रेस तो कश्मीर में नेकां मजबूत
लोकसभा चुनाव के आंकड़ों को देखें तो नेकां ने इंजीनियर रशीद की हवा में बारामुला सीट गंवाने के बावजूद अन्य लोकसभा सीटों पर बेहतर प्रदर्शन किया। इसी तरह से कांग्रेस ने सुचेतगढ़ सहित कुछ सीटों पर अच्छा प्रदर्शन किया। जम्मू संभाग में नेकां का आधार कमजोर है और कश्मीर में कांग्रेस का। वोटों में जीत-हार की खाई को पाटने के लिए भी दो विपरीत विचारधाराओं में चुनाव पूर्व गठबंधन मजबूरी बन गया।
गठबंधन को घेरने का मिला मौका
नेकां और कांग्रेस के बीच 83 सीटों पर गठबंधन होने के बाद से ही भाजपा दोनों पार्टियों पर हमलावर है। भाजपा के केंद्र में मंत्री जितेंद्र सिंह से लेकर प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र रैना, प्रदेश प्रभारी तरुण चुग और अन्य लगातार कांग्रेस से सवाल पूछ रहे हैं कि क्या कांग्रेस अनुच्छेद 370 की बहाली को लेकर नेकां के साथ है। इसे लेकर भाजपा ने पोस्ट वार शुरू कर रखी है। हर जगह अनुछेद 370 बहाली पर कांग्रेस से रुख साफ करने का सवाल पूछा जा रहा है। पीडीपी भी गठबंधन को लेकर नेकां पर हमलावर है और इसे मात्र सियासत बचाने तक सीमित करार दे रही है।
बहुत कुछ कहते हैं गठबंधन पर नेकां और कांग्रेस के बयान
हमारी कुछ मजबूरियां थीं। गठबंधन राष्ट्रीय मजबूरी के तहत किया गया। अगर गठबंधन के मापदंडों का पालन नहीं किया जाता, तो कांग्रेस सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार थी।-तारिक हमीद कर्रा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, (31 अगस्त)
अगर सियासत को बचाना है तो नेकां और कांग्रेस के बीच गठबंधन जरूरी है। गठबंधन में कभी-कभी लोग खफा हो जाते हैं तो कभी दुखी भी होते हैं। कई चीजें बर्दाश्त करनी पड़ती हैं। गठबंधन का जो अंतिम फैसला हुआ है, बहुत अच्छा हुआ है। हमें कामयाबी जरूर मिलेगी। -फारूक अब्दुल्ला, अध्यक्ष, नेकां (27 अगस्त)
केंद्र शासित प्रदेश के लोगों को नेकां-कांग्रेस गठबंधन के दुर्भावनापूर्ण इरादों से सावधान रहना चाहिए। वे पाकिस्तान के हाथों में खेल रहे हैं। नेकां-कांग्रेस गठबंधन का एकमात्र एजेंडा आईएसआई के साथ जुड़ा है। यह उस कार्य को बाधित करना है जो मोदी ने क्षेत्र के विकास और समृद्धि के लिए किया है। नया गठबंधन जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को फिर से बढ़ावा देगा।-तरुण चुग, राष्ट्रीय महासचिव भाजपा (31 अगस्त)