इसमें यशपाल को कुछ महीने पहले जीएमसी जम्मू में सेकेंडरी स्क्लेरल फिक्सेटेड इंट्राओकुलर लेंस (एसएफआईओएल) प्रत्यारोपण किया गया था। हाल ही में की गई प्रक्रिया का उद्देश्य कॉर्नियल क्षति को ठीक करना और दृष्टि दोष से दीर्घकालिक राहत प्रदान करना था, जिससे उसके जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार हुआ।
इसी तरह भूपेंद्र नाग पूर्ववर्ती स्टेफिलोमा के मामले में, पूर्ववर्ती स्टेफिलेक्टोमी के साथ दाहिनी आंख में एक जटिल पेनेट्रेटिंग केराटोप्लास्टी से गुजरना पड़ा। इस नाजुक प्रक्रिया में स्टेफिलोमा को हटाना शामिल था, जिससे कॉर्निया में गंभीर विकृति आ गई थी और इसे एक स्वस्थ दाता कॉर्निया से बदलना था। आगे की जटिलताओं को रोकने और रोगी की दृष्टि को बहाल करने में यह सर्जरी महत्वपूर्ण थी।
प्रत्यारोपण सर्जरी टीम में डॉ. नलिनी बीरपुरी, डॉ. सिमरनजीत सिंह, डॉ. सुशांत खरका, रिफात (एसएसएन) और प्रीतम चंद (एमटीएस), आई बैंक के प्रोफेसर व प्रबंध निदेशक डॉ. हंसराज शर्मा, डॉ. विजयता गुप्ता, डॉ. तपन शर्मा, डॉ. निहारिका वर्मा और डॉ. स्वाति महाजन शामिल रहे। बताया जाता है कि जीएमसी में इस 25वां कार्निया दान से 50 जरूरतमंद मरीजों को कार्निया प्रत्यारोपित किया जा चुका है।