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राष्ट्रीय खेल दिवस: खेल-खेल में बिश्नाह की अनीशा ने पकड़ी बंदूक, अब हर निशाने पर मिल रहे मेडल

सार

ट्रायल नजदीक आते ही अनीशा ने दिनभर अभ्यास के लिए घर छोड़ा दिया था, क्योंकि रेंज वहां से 20 किलोमीटर दूर थी। फिर अपनी नानी के घर तालाब तिल्लो से ही रोजाना रेंज पर पहुंचकर पसीना बहाया।
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अनीशा शर्मा
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विस्तार
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किशोरावस्था में जब लड़कियां पायलट, शिक्षक, डॉक्टर या इंजीनियर बनकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का सपना देखती हैं, उसी उम्र में जम्मू की अनीशा शर्मा ने पेशेवर निशानेबाज बनने का सपना संजोया। साथ ही इसे माता-पिता व कोच के सहयोग और मेहनत से साकार भी किया। 

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जम्मू के सीमावर्ती बिश्नाह निवासी बैंकर राम राज शर्मा और शिक्षिका अंजलि शर्मा के घर जन्मीं अनीशा एक बेहतरीन निशानेबाज हैं। उन्होंने खेल-खेल में बंदूक पकड़ी और इसे करियर बना लिया। पेशेवर निशानेबाजी में वह अब तक राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीतकर प्रदेश का नाम रोशन कर चुकी हैं। उनका सपना ओलंपिक में गोल्ड जीतना है, जिसके लिए वह कड़ी मेहनत में जुट चुकी हैं।

2018 में शूटिंग को करियर के रूप में अपनाने वाली 17 वर्षीय अनीशा ने सफलता की पांच साल की लंबी यात्रा को साझा करते हुए बताया कि मेरे परिवार की खेल की पृष्ठभूमि नहीं है। स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान शूटिंग का अभ्यास शुरू कर दिया था। उस समय स्कूल में निशानेेबाजी प्रतियोगिता हुई, जिसमें भाग लिया। यह खेल इतना पसंद आया कि इसे पेशेवर रूप में अपनाने का फैसला लिया। कम उम्र में कई अवार्ड जीतने वाली अनीशा ने सपने को साकार करने में सहयोग देने के लिए माता-पिता व कोच विशाल मेहरा का आभार जताया। वह ऑल इंडिया जूनियर शूटिंग की श्रेणी में पांचवीं रैंक पर पहुंच गई हैं।
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जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक एवं जम्मू-कश्मीर राइफल एसोसिएशन (जेकेआरए) के संरक्षक दिलबाग सिंह ने प्रशस्ति प्रमाण पत्र क्लास-1 और 2021 में भारतीय शूटिंग टीम में चयन के लिए नकद इनाम से भी सम्मानित किया है। ओलंपियन एवं विश्व चैंपियन को हराने, दो व्यक्तिगत स्वर्ण पदक व एक कांस्य हासिल करके 21वीं केएसएस चैंपियनशिप में हैट्रिक बनाने के लिए उन्हें नकद इनाम से भी सम्मानित किया है।

पहली बार इंडिया जीवी मावलंकर शूटिंग चैंपियनशिप के लिए किया था क्वालीफाई
उन्होंने बताया कि 2018 में कोचिंग के शुरुआती दिनों में महाराष्ट्र में आयोजित जीवी मावलंकर शूटिंग चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया था। उसी वर्ष केरल के तिरुवनंतपुरम में पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2021 में भारतीय टीम का हिस्सा बनीं और खेलो इंडिया यूथ गेम्स में छठे स्थान पर रहीं। वर्तमान में भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के तत्वावधान में खेलो इंडिया योजना में राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) का हिस्सा हैं।

यह हैं अनीशा की उपलब्धियां
अनीशा ने मई 2023 में दिल्ली में आयोजित इंडिया ओपन प्रतियोगिता में दो व्यक्तिगत स्वर्ण पदक, जून 2023 में चंद्रो तोमर शूटिंग रेंज नोएडा में 66वें राष्ट्रीय स्कूल खेलों में स्वर्ण पदक, नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) की ओर से जून-जुलाई में आयोजित भारतीय टीम सेलेक्शन ट्रायल्स में स्वर्ण पदक जीता है। इसके साथ ही 10 से 16 अगस्त तक भोपाल में इंडिया ओपन शूटिंग प्रतियोगिता में सीनियर और जूनियर वर्ग में दो व्यक्तिगत स्वर्ण पदक और टीम स्पर्धाओं में जूनियर-सीनियर वर्ग में दो स्वर्ण पदक व एक रजत पदक जीता है।

सपने के लिए घर छोड़ा, नानी के पास रहकर पाया मुकाम

दिन में करीब पांच से छह घंटे पसीना बहाने वाली निशानेबाज जम्मू-कश्मीर की उन महिला खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा हैं, जो उनके जैसा बनना चाहती हैं। कोच विशाल मेहरा के अनुसार शूटिंग के प्रति समर्पण और प्रतिबद्धता के चलते अनीशा ने हर जगह सफलता पाई है। प्रतियोगिता की तैयारी के लिए उन्होंने अपने दोस्त की राइफल मांगी और उसी से अनीशा को प्रशिक्षित किया। उसके बाद माता-पिता ने भी सहयोग दिया। खेलो इंडिया के ट्रायल नजदीक आते ही अनीशा ने दिनभर अभ्यास के लिए घर छोड़ा दिया था, क्योंकि रेंज वहां से 20 किलोमीटर दूर थी। फिर अपनी नानी के घर तालाब तिल्लो से ही रोजाना रेंज पर पहुंचकर पसीना बहाया। कोच ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से उत्कृष्ट परिणामों के लिए शूटिंग को बढ़ावा देने के साथ-साथ बेहतर सरकारी बुनियादी ढांचे के विकास की अपील की है।

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