तवी नदी समेत जिले के सात नालों से खनन की बोली लग चुकी है। इसमें पंजाब और जम्मू के ठेकेदारों में बोली को लेकर घमासान मचा। आलम यह है कि 2.94 लाख रुपये की प्रस्तावित बोली 35 करोड़ रुपये तक चली गई, जो तय बोली का 1166 गुना ज्यादा है।
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि तवी समेत नदी नालों का सीना छलनी करने की साजिश है। इस साजिश का सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा, क्योंकि ठेकेदारों ने इतनी बड़ी कीमत लगाकर खनन का ठेका लिया है। इससे जाहिर है कि पैसा पूरा करने के लिए या तो अवैध खनन होगा या फिर सामग्री का मूल्य बढ़ाकर आम लोगों से वसूली होगी। हालांकि खनन विभाग का दावा है कि वह लोग ऐसा नहीं कर सकते। इसके लिए जिला प्रशासन ने मूल्य तय किया हुआ है। अधिक वसूली पर कार्रवाई होगी।
जानकारी के अनुसार जम्मू में 7 जगहों पर छोटे खनन का ठेका देने के लिए ऑनलाइन बोली लगाई गई। इन सात जगहों पर तवी नदी के अधीन निक्की तवी के तीन ब्लॉक, सरदन नाले के तीन ब्लॉक और एक ब्लॉक झज्जर नाले का है। निक्की तवी के चक गणेशू ब्लॉक की पांच साल के लिए खनन करने की प्रस्तावित बोली 2.86 लाख थी, सूर्या चक 2.79 लाख और बडियाल ब्राह्मणा 2.94 लाख।
इसी तरह सरदन नाले के तीन ब्लॉक के लिए ब्लॉक 27 की प्रस्तावित बोली 1.62 लाख रुपये, ब्लॉक 28 की 1 लाख और ब्लॉक 29 की 1.90 लाख रुपये थी। झज्जर नाले की बोली 2 लाख रुपये थी, लेकिन जब बोली लगाई गई, तो निक्की तवी के बडियाल ब्राह्मणा ब्लॉक की बोली 35 करोड़ तक चली गई, जबकि सूर्या चक और गणेशू चक की बोली 30 करोड़ रुपये गई। इसके अलावा सरदन नाले के ब्लॉक 29 की बोली 11.86 करोड़ और बाकी के दो ब्लॉक की बोली 10 करोड़ तक गई। झज्जर नाले की बोली 7 करोड़ रुपये तक चली गई।
इन लोगों ने लगाई बोली
लुधियाना के रहने वाले विनोद कुमार ने निक्की तवी के एक ब्लॉक के लिए 35 करोड़ रुपये की बोली लगाई, जबकि हक्कल के रहने वाले सुभाष कुमार ने दो ब्लॉक की बोली लगाई, जो 30 करोड़ रुपये तक है। वहीं सरदन नाले के तीनों ब्लॉक पंजाब के रहने वाले ठेेकेदारों ने लगाई। झज्जर नाले की बोली जम्मू के रहने वाले भारत भूषण ने 7 करोड़ रुपये लगाई।
7 करोड़ की अधिकतम बोली थी, इस बार 35 करोड़
बता दें कि पांच साल के लिए खनन का ठेका होता है। पिछली बार अधिकतम बोली 7 करोड़ रुपये तक की थी। इस बार अधिकतम बोली 35 करोड़ रुपये तक चली गई। यह पिछली बार से कम से कम पांच गुना अधिक है।
सिर्फ एक जगह के पैसे जमा हुए
जिन लोगों ने बोली लगाई है, इनमें से अब तक सिर्फ एक ही व्यक्ति ने बोली का 50 फीसदी जमा कराया है, क्योंकि लीज से पहले 50 फीसदी जमा कराना होता है। बाकी के 6 लोगों ने अब तक पैसा जमा नहीं कराया है। सिर्फ झज्जर नाले की बोली लगाने वाले भारत भूषण ने ही पैसा जमा कराया था।
नहीं बेच सकते महंगे दाम पर सामग्री
बोली अधिक लगाने की दो वजह हो सकती हैं। एक गुस्से और तैश में आना। दूसरा बोली की रकम को तोड़फोड़ करना, ताकि दूसरा भी न ले सके। बोली बेशक अधिक लगाई गई है, लेकिन यह लोग सामग्री महंगी नहीं बेच सकते। जिला प्रशासन की ओर से मूल्य तय है। अब तक 7 में से एक व्यक्ति ने ही पैसा जमा कराया है। यदि मंगलवार शाम तक पैसा जमा नहीं होता, तो दोबारा से नीलामी होगी। या फिर दूसरे नंबर के बिडर को नोटिस देकर आमंत्रित किया जाएगा। -ओपी भगत, निदेशक, खनन विभाग।
इतनी सामग्री नहीं, जितनी बोली लगाई
सूत्रों की मानें तो अगले पांच साल तक यदि यह ठेकेदार काम करते हैं, तो भी 5 से 6 करोड़ रुपये से अधिक का पैसा नहीं कमा सकते। अधिक बोली लगाने की एक ही वजह हो सकती है कि इसको ब्लैक में बेचा जाए। ऐसा होता भी आया है। खनन का ठेका लेने वाले अपनी सीमा से अधिक क्षेत्र का माल उठाते हैं। इसको बाद में ब्लैक में बेचते हैं। यहीं कारण है कि ठेकेदारों ने इतनी बोली लगाई।
सबसे शुद्ध रेत बड़ियाल ब्राह्मणा का
सूत्रों का कहना है कि निक्की तवी का बडियाल ब्राह्मणा ब्लॉक की रेत बहुत ही शुद्ध होती है। इसकी दूसरे राज्यों में भी जोरदार मांग रहती है। इसको 3 हजार रुपये प्रति ट्राली तक बेचा जाता है। यहां तक कि अवैध रूप से भी इसका जमकर खनन होता है। अब तो वैध रूप से ठेका लिया गया है। यही कारण है कि इसकी बोली सबसे अधिक 35 करोड़ रुपये तक लगाई गई।