- फूलों से सजे सेना के वाहन के साथ निकाली अंतिम यात्रा
- लद्दाख में हिमस्खलन की चपेट में आकर हुए गए थे बलिदान
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। सियाचिन ग्लेशियर में प्राणों की आहुति देने वाले बलिदानी सिपाही हरीश सिंह जसरोटिया वीरवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। पैतृक गांव जंडोर गांव के श्मशानघाट में उनका अंतिम संस्कार सैनिक सम्मान के साथ किया गया। इसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों के अलावा पूर्व सैनिकों और युवाओं ने श्रद्धासुमन अर्पित किए।
वीरवार सुबह फूलों से सजे सेना के वाहन से अंतिम यात्रा निकाली गई। इस दौरान उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करने वाले लोगों की भीड़ रही। हाथ में तिरंगा लिए युवाओं ने भारत माता की जय और हरीश सिंह जसरोटिया अमर रहे के नारे लगाए। श्मशानघाट पहुंचने पर सबसे पहले सेना के अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित किए और फिर जवानों ने सशस्त्र सलामी दी।
इसके बाद विधायक जसरोटा राजीव जसरोटिया, जिला विकास परिषद के सदस्य संदीप मजोत्रा, पूर्व मंत्री बाबू सिंह, जम्मू कश्मीर एक्स सर्विस वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन कैप्टन ज्ञान सिंह पठानिया ने एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ श्रद्धासुमन अर्पित किए। अंत में बलिदानी जवान के बड़े भाई जय केशव सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी।
इस मौके पर बलिदानी जवान के पिता जरनैल सिंह ने कहा कि उनके बेटे ने भारत माता की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है। इससे दुख तो है, लेकिन इस बात का भी गर्व है कि मां भारती की रक्षा में अपना जीवन अर्पित करने वालों में उनका बेटा भी शामिल हुआ है।
वहीं, विधायक राजीव जसरोटिया ने जवान को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। जसरोटिया ने कहा कि कठुआ वीरों की धरती है। इसमें कंडी क्षेत्र के युवा सबसे अग्रणी है। देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वालों में इस इलाके के जवान सबसे ज्यादा हैं। उन्होंने युवाओं को प्रेरणा लेकर राष्ट्रनिर्माण में योगदान देने की अपील की।
गांव के बेटे की शहादत से जंडोर में मातम
बलिदानी हरीश सिंह जसरोटिया के पिता जरनैल सिंह बताया कि उन्हें मंगलवार को ही बेटे के वीरगति के प्राप्त होने की सूचना मिल गई थी। मगर बुधवार देर शाम को जब उसका पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो मां तृप्ता देवी के साथ उसकी तीनों बहनों रेखा रानी, बबिता रानी और तनुजा का हाल बेहाल हो गया। सेना की वर्दी पहनने वाले जिस बेटे और भाई को देख उन्हें गर्व होता था आज वह उनके सामने मृत था। वहीं, रात भर उनके घर में शोक जताने वालों की भीड़ लगी रही।
मिलनसार थे सिपाही हरीश सिंह जसरोटिया
अंतिम संस्कार में शामिल होने के आए युवाओं ने बताया कि हरिश सिंह जसरोटिया काफी मिलनसार थे। पांच साल पहले भारतीय सेना का हिस्सा बनने के बाद जब भी वह छुट्टी पर आते थे तो अपने दोस्तोंं से मिलना और बुजुर्गाें से आशीर्वाद प्राप्त करना उनकी प्राथमिकता होती थी। युवाओं ने बताया कि देश के प्रति प्रेम उनके कण-कण में बसा था। इसलिए सेना की भर्ती को पास करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत भी की थी।